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सोमवार, 16 जनवरी, 2006 को 08:15 GMT तक के समाचार
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क्वात्रोकी ने कहा, मामला ख़त्म हो
ओत्तावियो क्वात्रोकी
ओत्तावियो क्वात्रोकी के गाँधी परिवार से संबंधों को लेकर राजनीतिक बवाल मचता रहा है
इतालवी व्यवसायी और बोफ़ोर्स मामले के अभियुक्त ओत्तावियो क्वात्रोकी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि भारत सरकार को उनके ख़िलाफ़ मामला ख़त्म कर देना चाहिए.

उन्होंने कहा है कि चूंकि सीबीआई को उनके ख़िलाफ़ अब तक कोई सबूत नहीं मिले हैं इसलिए इस मामले को ख़त्म कर देना भारत के हित में होगा.

इटली के मिलान शहर में रह रहे क्वात्रोकी ने एक बयान जारी करके कहा है कि सबूतों के अभाव में ब्रितानी अधिकारियों को पास उनका खाता खोल देने के अलावा कोई चारा नहीं था.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ओर से ब्रितानी अधिकारियों को स्वीकृति दी थी कि क्वात्रोकी का लंदन का खाता खोल देना चाहिए.

उधर लंदन के हाईकोर्ट ने 11 जनवरी को क्वात्रोकी के खाते खोल देने के आदेश दिए थे.

उनका खाता सीबीआई के अनुरोध पर सील किए गए थे.

इस पूरे मामले ने भारत में एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने क्वात्रोकी को क्लीनचिट दे दी है. विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि क्वात्रोकी के नेहरु-गाँधी परिवार से नज़दीकी रिश्ते रहे हैं.

न्याय के हित में

ओत्तावियो क्वात्रोकी पर आरोप है कि वे बोफ़ोर्स तोप की ख़रीदी में दी गई 64 करोड़ रुपए की दलाली के मामले में शामिल थे.

यह मामला राजीव गाँधी के प्रधानमंत्रित्व काल का है.

 मैं समझता हूँ कि यह न्याय और भारत की प्रतिष्ठा के हक़ में होगा कि मेरे ख़िलाफ़ चल रहे मामले को ख़त्म कर दिया जाए
ओत्तावियो क्वात्रोकी

अपने बयान में ओत्तावियो क्वात्रोकी ने कहा है, "मैं समझता हूँ कि यह न्याय और भारत की प्रतिष्ठा के हक़ में होगा कि मेरे ख़िलाफ़ चल रहे मामले को ख़त्म कर दिया जाए."

उन्होंने कहा है, "भारत की अग्रणी जाँच एजेंसी सीबीआई के दुनिया भर में संबंध-संपर्क हैं और इस एजेंसी ने 20 बरस तक बोफ़ोर्स मामले की जाँच की है लेकिन उन्हें मेरे ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले हैं."

बोफ़ोर्स तोप
बोफ़ोर्स तोप की ख़रीदी में दलाली के आरोप हैं जिसकी जाँच सीबीआई कर रही है

भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना क्वात्रोकी ने कहा है कि एक राजनीतिक गाँधी परिवार के ख़िलाफ़ जो अभियान चला रहा है, वे उसके शिकार हो गए हैं.

अपने बैंक खाते खोले जाने के बारे में उन्होंने कहा है कि पिछले तीन साल में सीबीआई उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं दे पाई और ऐसे में ब्रितानी अधिकारियों के पास उनके खाते खोलने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था.

भारतीय मीडिया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कई जगह इस मामले की अधूरी जानकारी के आधार पर ख़बरें लिखी जा रही हैं.

उन्होंने कहा है कि यह नहीं भूलना चाहिए कि वर्ष 2000 से 2003 के बीच उन्होंने वे सारे मुक़दमे जीते हैं जो सीबीआई ने मलेशिया से उन्हें प्रत्यार्पित करने के लिए दायर किए थे.

उल्लेखनीय है कि क्वात्रोकी मलेशिया से व्यवसाय करते हैं.

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