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केंद्र ने फूकन समिति की रिपोर्ट ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार ने तहलका मामले की जाँच के लिए गठित फूकन समिति की रिपोर्ट को 'अपूर्ण' कहते हुए ठुकरा दिया है. शुक्रवार को फूकन समिति की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई. इस समिति की अध्यक्षता जस्टिस एसएन फूकन ने की थी. एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया, "फूकन समिति को तहलका मामले में जिन चार मुद्दों पर जाँच करने को कहा गया था, उसमें से समिति ने सिर्फ़ दो पर ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है. इसलिए सरकार इस रिपोर्ट को ठुकरा रही है." तहलका मामले के सामने आने के बाद तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने इसकी जाँच के लिए वेंकटस्वामी आयोग का गठन किया था लेकिन बीच में जस्टिस जी वेंकटस्वामी के इस्तीफ़े के बाद जस्टिस एसएन फूकन को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के सत्ता में आने के बाद फूकन समिति का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया और इसकी जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी. तहलका के टेप में एक कथित रक्षा सौदे में सहयोग देने के लिए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण, समता पार्टी नेता जया जेटली और कई सैन्य अधिकारियों को पैसा लेते हुए दिखाया गया था. इस मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडीस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. जिसके कारण उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था. हालाँकि बाद में वे फिर रक्षा मंत्री के रूप में कैबिनेट में लौट आए. विवाद पहले तो सरकार अड़ी हुई थी कि वह फूकन समिति की रिपोर्ट संसद में फ़िलहाल नहीं रखेगी लेकिन बाद में वो राजी हो गई. संसदीय कार्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बताया कि फूकन समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी. वैसे सरकार को तीन भागों में आने वाली रिपोर्ट का पहला हिस्सा ही अभी मिला है. पूर्व रक्षामंत्री फ़र्नांडिस ने आरोप लगाया था कि सरकार रक्षा मामलों में बहस को टालना चाहती है. |
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