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सोमवार, 04 अक्तूबर, 2004 को 10:45 GMT तक के समाचार
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अब सीबीआई करेगी तहलका की जाँच
तहलका
तहलका ने रक्षा सौदों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर वीडियो फ़िल्म बनाई थी
तहलका मामले की जाँच अब फूकन आयोग की जगह केंद्रीय जाँच समिति सीबीआई करेगी.

फूकन आयोग का कार्यकाल रविवार को समाप्त हो गया था और केंद्र सरकार ने फ़ैसला किया है कि उसका कार्यकाल आगे न बढ़ाकर आयोग को ख़त्म कर दिया जाए.

उल्लेखनीय है कि तहलका मामले के सामने आने के बाद तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने इसकी जाँच के लिए वेंकटस्वामी आयोग का गठन किया था लेकिन बीच में जस्टिस जी वेंकटस्वामी के इस्तीफ़े के बाद जस्टिस एसएन फूकन को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

तहलका के टेप में एक कथित रक्षा सौदे में सहयोग देने के लिए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण, समता पार्टी नेता जया जेटली और कई सैन्य अधिकारियों को पैसा लेते हुए दिखाया गया था.

टेप में कई सैन्य अधिकारियों को होटल के कमरे में शराब पीते, पैसे लेते और रंगरेलियाँ मनाते हुए भी दिखाया गया था.

मंशा पर सवाल

केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने आयोग को समाप्त करने की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार की मंशा ही नहीं थी कि भ्रष्टाचार उजागर हो इसलिए उसने पूरे मामले को कमीशन पर डाल दिया.

हंसराज भारद्वाज
भारद्वाज ने कहा है कि सीबीआई के लिए समय सीमा भी तय की जाएगी

उनका कहना था कि इससे 2001 से 2004 तक का समय ही ख़राब हुआ.

एक पत्रकारवार्ता में क़ानून मंत्री भारद्वाज ने कहा कि तहलका के टेप सीबीआई को सौंप दिए जाएँगे और फिर एजेंसी तय करेगी कि इस मामले में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई सिर्फ़ इस बात की जाँच करेगी कि टेप में जो लोग दिख रहे हैं उनकी भूमिका क्या थी, एजेंसी का काम रक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार की जाँच करना नहीं होगा.

हंसराज भारद्वाज का कहना था कि सेना ने तो इस मामले में शामिल अधिकारियों का कोर्ट मार्शल कर दिया लेकिन बंगारू लक्ष्मण और जया जेटली सहित कई असैनिक नागरिकों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

क़ानून बनेगा

यह पूछने पर कि जाँच आयोग की उस आरंभिक रिपोर्ट का क्या किया जाएगा जिसमें पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस को निर्दोष बताया गया था, क़ानून मंत्री भारद्वाज ने कहा कि आयोग ने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं दी है.

टेप से ली गई एक तस्वीर
पिछले चार साल से मामले की जाँच आयोग कर रहा था

उनका कहना था, "आयोग ने अब तक सिर्फ़ इस बात की जाँच की है कि तहलका टेप सही थे या नहीं और उनके साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई थी."

उन्होंने कहा कि जाँच तो इस बात की होनी थी कि टेप में दिख रहे लोगों की क्या भूमिका थी लेकिन पूरी जाँच इस बात पर केंद्रित हो गई कि इसमें शामिल पत्रकारों की भूमिका क्या थी.

उन्होंने तहलका मामले का समर्थन करते हुए कहा कि अब खोजी पत्रकारिता बदल गई है और नई तकनीकों का इस्तेमाल होने लगा है. उन्होंने पत्रकारों को गवाह की तरह बताया.

उन्होंने कहा कि इस तरह के भ्रष्टाचार की सूचना देने वाले लोगों को क़ानूनी संरक्षण देने के लिए सरकार एक क़ानून बनाने जा रही है.

उल्लेखनीय है कि स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने के बाद इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की हत्या के बाद से इस तरह के क़ानून की माँग की जा रही है.

भाजपा का विरोध

भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह निर्णय राजनीति से प्रेरित है और भाजपा इसकी निंदा करती है.

भाजपा के महासचिव अरूण जेटली ने कहा कि एक न्यायिक आयोग इसकी जाँच करे इसके स्थान पर सरकार का फ़ैसला है कि एक कार्यपालक एजेंसी इसकी जाँच करे.

उन्होंने पूछा, "जस्टिस फूकन अपनी एक रिपोर्ट दे चुके हैं तो क्या अब सरकार सीबीआई के माध्यम से उस फ़ैसले को पलटने की कोशिश करेगी."

उनका कहना था कि ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक न्यायिक आयोग का कार्यकाल न बढ़ाया जाए और एक कार्यपालक एजेंसी को यह जाँच दे दी जाए. ऐसा शायद इसलिए किया गया है क्योंकि सरकार को एनडीए के सदस्य को लेकर दिया गया फूकन आयोग का फ़ैसला जँच नहीं रहा है.

जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि भाजपा को जवाब देना चाहिए जब एक टेलीविज़न कैमरे ने लोगों को घूस लेते हुए दिखा दिया तो क्यों चार साल में क्यों कार्रवाई नहीं की गई.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पूछा कि क्यों आज तक कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी तरह के प्रतिशोध में भरोसा नहीं करती और फ़ौजदारी कार्रवाई के लिए सीबीआई को यह मामला सौंपना निष्पक्ष जाँच का सबसे अच्छा रास्ता था.

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