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'फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट' देने वाला डॉक्टर निलंबित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आगरा के सरकारी मानसिक रोग अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. एसके गुप्ता नाम के इस डॉक्टर पर रिश्वत लेकर सामान्य महिलाओं के पागल होने का सर्टिफ़िकेट जारी करने का आरोप है. हथियार सौदे में धाँधली का भंडाफोड़ करने वाली वेबसाइट 'तहलका' की वीडियो रिकॉर्डिंग में डॉक्टर गुप्ता को नोट गिनते और सर्टिफ़िकेट बनाते दिखाया गया है. दिल्ली में वेबसाइट और साप्ताहिक पत्रिका 'तहलका' के संपादक तरूण तेजपाल ने पत्रकारों को 22 मिनट की एक फ़िल्म दिखाई जिसे एक छिपे हुए कैमरे से रिकॉर्ड किया गया था. 'तहलका' ने आरोप लगाया कि डॉक्टर गुप्ता रिश्वत लेकर पुरूषों को ऐसे सर्टिफ़िकेट जारी करते थे जिनके आधार पर उन्हें अपनी पत्नियों से आसानी से तलाक़ मिल जाता था. 'तहलका' के नौ हज़ार रूपए लेकर फ़र्ज़ी सर्टिफ़िकेट देने के आरोप के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉक्टर गुप्ता को निलंबित कर दिया है और पुलिस उनकी तलाश कर रही है. आगरा पुलिस का कहना है कि डॉक्टर गुप्ता के घर और दफ़्तर में छापे मारे गए हैं और उनकी तलाश की जा रही है लेकिन वे गिरफ़्तारी के डर से लापता हो गए हैं. आगरा के पुलिस अधीक्षक आशुतोष पांडेय ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "यह मामला सिर्फ़ जालसाज़ी का नहीं है, यह किसी के जीवन का भी सवाल है, हम बहुत गंभीरता से जाँच कर रहे हैं." कई महिला संगठनों ने इस मामले की पूरी मुस्तैदी से जाँच करने और डॉक्टर गुप्ता के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है. महिला संगठनों का कहना है कि भारत में महिलाओं को तलाक़ देने या संपत्ति के अधिकार से बचने के लिए अक्सर मानसिक अक्षमता की दलील का सहारा लिया जाता है इसलिए इस मामले में कड़ाई बरती जानी चाहिए. समाचार एजेंसी पीटीआई ने समाचार दिया है कि लापता होने से पहले डॉक्टर गुप्ता ने कुछ पत्रकारों से बातचीत करते हुए इन आरोपों को "निराधार" बताया था. |
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