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तहलका के टेप असली हैं: विशेषज्ञ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'तहलका' मामले की जाँच कर रहे फुकन आयोग के सामने बयान देते हुए विशेषज्ञ ने कहा है कि 'तहलका' के टेप असली हैं और उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. 'तहलका' ने एक कथित रक्षा सौदे में दलाली का एक मामला उजागर किया था. 'तहलका' की फ़िल्म में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष बंगारु लक्ष्मण को पैसे लेते हुए दिखाया गया था. इस कथित सौदे में सेना के कई अधिकारियों सहित समता पार्टी नेता जया जेटली की भी भागीदारी दिखाई गई थी. बाद में जया जेटली ने आरोप लगाया था कि 'तहलका' की फ़िल्म जोड़तोड़ कर बनाई गई है. इसके बाद जाँच आयोग ने इस फ़िल्म को जाँच के लिए लंदन भेज दिया था. ब्यूरो ऑफ़ फ़ोरेंसिक साइंस के विशेषज्ञ जेम्स मथ्यू कास ने कहा है कि हालांकि टेपों के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है लेकिन टेप की जो प्रतियाँ मीडिया को जारी की गईं थीं उनका संपादन किया गया था. उन्होंने कहा है कि उन्हें लगता है कि 'तहलका' की फ़िल्में कैमरे से निकाली गई असली फ़िल्म हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि फ़िल्म का बाद में संपादन हुआ लेकिन वे नहीं कह सकते कि संपादन में कोई चालाकी की गई या नहीं. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार विशेषज्ञ ने कहा है कि उन्होंने अपनी जाँच में यह नहीं पाया कि टेप में शूटिंग के बाद कोई जोड़तोड़ की गई है. विशेषज्ञ की इस राय के बाद सुपरिचित क़ानून विशेषज्ञ शांति भूषण ने बीबीसी से कहा कि इस रिपोर्ट के बाद आयोग के पास अब इसके सिवा कोई चारा नहीं बचा है कि वह इसे अपनी रिपोर्ट में शामिल करे. उन्होंने कहा कि अब सरकार को तय करना होगा कि वह इस मामले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करे. उनका कहना था कि 'तहलका' के पास यह विकल्प होगा कि वह टेप की शिकायत करने वालों के ख़िलाफ़ अदालत में जाए. |
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