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मेजर जनरल को एक साल की सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रक्षा मामलों से जुड़े तहलका टेप कांड के सिलसिले में सैन्य अदालत ने कार्रवाई करते हुए मेजर जनरल पी एस के चौधरी को एक साल सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है. चौधरी को घूस लेने और ग़लत व्यवहार करने का दोषी पाया गया है. सात सदस्यीय जनरल कोर्ट मार्शल के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल सी सी छिन्ना ने चौधरी को सज़ा सुनाई और कहा कि यह सज़ा तहलका वीडियो टेप के आधार पर सुनाई गई है. तहलका के टेप में दिखाया गया था कि चौधरी हथियारों के सौदागरों से एक सोने की चेन और एक लाख रुपए ले रहे हैं. कोर्ट मार्शल में ये भी पाया गया कि चौधरी ने सेना के अनुशासन संबंधी नियमों का पालन नहीं किया. जब चौधरी को तहलका टेप पर रिकार्ड किया गया उस समय वह दिल्ली में हथियार एवं उपकरण की ख़रीद से जुड़े विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत थे. इससे पहले आर्डिनेंस शाखा के मेजर अनिल शर्मा को भी इन्ही आरोपों के तहत पद से बर्खास्त किया जा चुका है और चार साल की कैद की सज़ा सुनाई गई है. तहलका ने क़रीब चार साल पहले रक्षा सौदों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिशो के तहत कई टेप बनाए थे जिसमें सेना के बड़े अधिकारियों और नेताओं गुपचुप वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी. टेप बनाने के दौरान तहलका के पत्रकार हथियारों के सौदागर बने और सेना के अधिकारियों को हथियार बेचने की कोशिश की. मामले में पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडिस और कई नेताओं के नाम आए और अभी भी इस मामले में जाँच का काम चल रहा है. |
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