|
नेपाल में माओवादियों की नाकाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के शासन को समाप्त करने के लिए मंगलवार से अनिश्चितकाल के लिए देशव्यापी नाकाबंदी की घोषणा की है. दूसरी ओर नेपाल सरकार ने माओवादियों को क्षमादान का नया प्रस्ताव रखा है. माओवादियों ने घोषणा की है कि वे मंगलवार से नेपाल के सभी शहरों में अनिश्चितकालीन नाकेबंदी की शुरुआत कर देंगे. नेपाल प्रशासन के लिए इसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है. इधर नेपाल प्रशासन का कहना है कि जिन माओवादियों ने तीन महीने के अंदर आत्मसमर्पण किया है, उनको क्षमादान दिया जा सकता है. प्रस्ताव नेपाल के गृह मंत्री कमल थापा ने आत्मसमर्पण करनेवाले माओवादियों को नकद राशि देने की भी घोषणा की. उनका कहना था कि ऐसे लोगों की 14 हज़ार डॉलर और स्वास्थ्य सुविधाएं, नौकरियाँ और ज़मीन उपलब्ध कराई जाएगी. पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने माओवादियों के सामने ऐसा ही प्रस्ताव रखा था. लेकिन इस बार यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब माओवादी नाकेबंदी करनेवाले हैं. नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमरे का कहना है कि माओवादियों और सात राजनीतिक दलों के बीच आंदोलन के स्वरूप को लेकर मतभेद सामने आए हैं. उनका कहना है कि माओवादी नाकाबंदी चाहते हैं जबकि राजनीतिक दल किसी अन्य तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि नाकाबंदी को लेकर माओवादी सक्रिय हो गए हैं. लेकिन प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पार्टियाँ राजनीतिक प्रक्रिया फिर शुरू करें'19 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'ज्ञानेंद्र निर्वासित होंगे या मुक़दमा चलेगा'13 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस देऊबा छह महीने बाद जेल से रिहा हुए14 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने रखा बातचीत का प्रस्ताव07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में हड़ताल से जनजीवन प्रभावित05 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश ने कहा, चुनाव नहीं रुकेंगे01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||