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'बजट की माया: कहीं हंसाया, कहीं रुलाया' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बजट को अधिकतर अख़बारों ने संतुलित बजट बताया है. पंजाब केसरी का शीर्षक है- न राहत, न आहत. अख़बार लिखता है कि आनेवाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच वित्त मंत्री ने ग्रामीणों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को लुभानेवाली योजनाओं पर धन वर्षा की घोषणा की है. दैनिक जागरण की सुर्खी है- चिदंबरम का फंडा, न गरम न ठंडा. अख़बार लिखता है कि वादों के गोलगप्पे, घोषणाओं का सांभर, रियायतों की रेवड़ियाँ, क्या कुछ नहीं है चिदंबरम के बजट दा ढाबा में. अपनी पाक कला का शानदार नमूना पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम एक लजीज़ मेनू लेकर आए हैं. हिंदुस्तान का शीर्षक है- दस बहाने करके ले गए दिल. अख़बार लिखता है कि कार हुई सस्ती, कोला भी कोल्ड, किसानों को कर्ज मिलेगा सस्ता. अख़बार के अनुसार चिदंबरम ने शाइनिंग इंडिया के सबसे प्रिय मुद्दे आय कर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, केवल सावधि जमाओं की बचत योजनाओं में शामिल करने के साथ ही छह मामलों पर रिटर्न भरने की अनिवार्यताओं को समाप्त कर दिया है. अंग्रेज़ी दैनिक इकोनॉमिक टाइम्स की हेडिंग है- मारुति, इडली, पास्ता बजट. अख़बार लिखता है कि आर्थिक सुधार इस बजट में खो गए. राष्ट्रीय सहारा का शीर्षक है- आयकर में बख्शा, सेवा कर में लपेटा. समाचारपत्र लिखता है कि किसानों को ब्याज में राहत, शहरियों को सस्ती कारों का तोहफा, सोनिया- वामदलों का दबाव, सीएमपी की योजनाओं पर जोर. अमर उजाला की सुर्खी है-चिदंबरम की चाशनी- कार, कर किसानों पर करम. अख़बार लिखता है कि इस साल पांच राज्यों में होनेवाले चुनावों के मद्देनज़र वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कवि तिरुवल्लूर की इन पंक्तियों को कि 'यह दुनिया उसी की है जो अपने काम दयालु भाव से करता है,' उसमें छिपे मूल मंत्र को आत्मसात किया है. नवभारत टाइम्स की शीर्षक है- बजट की माया: कहीं हंसाया, कहीं रुलाया. अख़बार लिखता है कि इनकम टैक्स में छोड़ा, लेकिन सर्विस टैक्स में निचोड़ा. अंग्रेज़ी दैनिक द हिंदू की हेडिंग है- वित्त मंत्री सुरक्षित खेले. अख़बार लिखता है कि सामजिक क्षेत्र के लिए बजट में प्रावधान किया गया है, आयकर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया और सर्विस टैक्स का दायरा बढ़ाया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रचनात्मकता से शून्य बजट' 28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार आम आदमी की योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार बजट की मुख्य बातों पर एक नज़र28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार बजट: विकास पर नज़र, नए कर नहीं28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार यह आम आदमी का बजट हैः मनमोहन28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया28 फ़रवरी, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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