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मंगलवार, 21 फ़रवरी, 2006 को 14:27 GMT तक के समाचार
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देशहित में खाया मुर्गा

मुर्गा
लोगों में बर्ड फ़्लू को लेकर तमाम तरह की शंकाएं हैं
देशभक्ति साबित करने के लिए लोग अपना ख़ून दे देते हैं और यहाँ तक कि अपनी जान भी दे देते हैं लेकिन अब लोग देशहित में मुर्गे भी खा रहे हैं.

ये वाकया था पशुपालन विभाग की मीडिया ब्रीफिंग का जहाँ अधिकारी ये साबित करने की पुरज़ोर कोशिश में लगे थे कि 70 डिग्री पर पका मुर्गा खाने में कोई परेशानी नहीं है.

हुआ कुछ यूं कि मंगलवार को रेल मंत्रालय ने ट्रेनों के मेनू में से चिकन और अंडे हटा दिए और उनके स्थान पर शाकाहारी भोजन ही पेश करने का फ़ैसला किया.

स्पष्ट था कि रेल मंत्रालय बर्ड फ़्लू के मामले में चिंतित था और कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता था.

इस ख़बर के बारे में पूछे जाने पर पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय को स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी गई है.

ये सलाह विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों पर आधारित है यानी कि 70 डिग्री पर पका मुर्गा खाना सुरक्षित है.

शाकाहारियों का मुर्गा

ऐसा नहीं था कि रेल मंत्रालय को विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों का पता नहीं था लेकिन भारत सरकार के अधिकारी बार बार ज़ोर दे रहे थे कि मुर्गा खाना सुरक्षित तो है.

इसे साबित करने के लिए प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान ही मुर्गियों के कबाब आए और सभी अधिकारियों ने उसे खाया भी. जी हाँ कैमरे के सामने.

यहाँ तक कि संयुक्त सचिव उपमा चौधरी ने मुर्गा खाते हुए बताया कि वो शुद्ध शाकाहारी हैं लेकिन देशहित में वो मुर्गा खा रही हैं.

अधिकारियों ने देश भर में मुर्गियों के मारे जाने के बारे में सवालों के जवाब तो दिए लेकिन प्रेस कांफ्रेस से लौटते वक्त मेरे ज़ेहन में यही सवाल घूमता रहा कि देशहित में मुर्गा खाना कितना सही है.

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