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गुरुवार, 16 फ़रवरी, 2006 को 07:07 GMT तक के समाचार
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अफ़वाहों से बंद हो जाते हैं शहर

नक्सली
प्रशासन और नक्सली दोनों मान रहे हैं कि बंद के पीछे अफ़वाह है
छत्तीसगढ़ के कई शहर पिछले पंद्रह दिनों में पाँच बार बंद हो चुके है.

दिलचस्प बात ये है कि हर बार शहरों में बंद किसी अफ़वाह के कारण हो रहा है.

कहा जाता है कि नक्सलियों ने बंद की अपील की है लेकिन नक्सलियों का कहना है कि उन्होंने किसी बंद की कोई अपील नहीं की है.

अफ़वाहों से बार-बार हो रहे बंद से आम लोग तो परेशान हैं, लगता है कि इस बार नक्सली भी कुछ असुविधाजनक स्थिति में हैं.

लेकिन इस घटना से क्षेत्र में नक्सलियों के आतंक का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.

स्कूल-बैंक सब बंद

बंद की अफवाह के कारण स्कूल-कॉलेज़ में ताला लग जा रहा है, सड़कों पर आवागमन ठप्प हो जा रहा है, दवा की दुकानें भी बंद हो जा रही हैं.

और तो और बैंक और पोस्ट ऑफिस भी बंद रह रहे हैं.

झारखंड और उत्तर प्रदेश से लगे इस इलाक़े में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है.

 किसी अप्रिय घटना की आशंका के मद्देनज़र पुलिस की गश्त तेज़ कर दी गई है. लेकिन आम जनता को भी बंद की अफ़वाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए
मनोज कुमार पिंगुआ, ज़िलाधीश

बुधवार को भी सरगुजा के कई हिस्से पूरी तरह बंद रहे. 15 दिनों में यह पांचवा अवसर था, जब बंद की अफ़वाह फैली और नक्सलियों से डरे हुए लोगों ने अपने कारोबार बंद कर लिए.

इस इलाके के किसी एक हिस्से से बंद की अफ़वाह उड़ी और जिले के अधिकांश हिस्सों में जन-जीवन ठप्प पड़ गया.

छत्तीसगढ़ को उत्तर-प्रदेश और झारखंड से जोड़ने वाली सरगुजा की सड़कों पर यातायात लगभग ठप्प रहा. बाज़ार सुबह से ही बंद थे. कई हिस्सों में बैंक और पोस्ट ऑफिस भी बंद रहे. इन इलाकों में स्कूलों में भी तालाबंदी रही.

सरगुजा के ज़िलाधीश मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया कि ज़िले में लगातार हो रहे बंद के कारण प्रशासन भी चिंतित है.

उन्होंने कहा, "किसी अप्रिय घटना की आशंका के मद्देनज़र पुलिस की गश्त तेज़ कर दी गई है. लेकिन आम जनता को भी बंद की अफ़वाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए."

नक्सलियों का डर

दूसरी ओर एक नक्सली नेता ने दावा किया है कि सरगुजा में बंद की अफ़वाह पुलिस-प्रशासन द्वारा फैलाई जा रही है.

 पुलिस लगातार बंद की अफ़वाह फैला कर आम जन-जीवन को ठप्प कर देना चाहती है, जिससे आम जनता में नक्सलियों के ख़िलाफ़ वातावरण बन सके
नक्सली नेता

झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमांत कमेटी के ज़ोनल कमांडर आकाश के अनुसार "पुलिस लगातार बंद की अफ़वाह फैला कर आम जन-जीवन को ठप्प कर देना चाहती है, जिससे आम जनता में नक्सलियों के ख़िलाफ़ वातावरण बन सके."

वैसे उनका दावा इस मामले में तथ्यपूर्ण लगता है कि नक्सलियों ने जब भी बंद का आव्हान किया है वो इसके लिए पर्चा बाँटते रहे हैं और मीडिया को भी इसकी सूचना देते रहे हैं लेकिन सरगुज़ा में हो रहे बंद के लिए ऐसा न तो पर्चा मिला है और न कोई सूचना.

नक्सली हमला
छत्तीसगढ़ में पिछले बरसों में नक्सली गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं

लगातार बढ़ती नक्सली हिंसा के कारण राज्य के अधिकांश नक्सल प्रभावित इलाकों में भय का वातावरण बना हुआ है.

पिछले 10 दिनों में ही नक्सलियों ने 21 पुलिसकर्मियों समेत 32 लोगों की हत्या कर दी है.

बुधवार को भी नक्सलियों ने 3 ग्रामीणों की हत्या कर दी.

सरगुजा पुलिस रेंज में भी नक्सलियों ने एक सप्ताह पहले एक थाने पर हमला कर के 2 पुलिसकर्मियों को मार डाला था और 14 बंदूके लूट ली थीं.

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