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फ्रांस-भारत परमाणु सहयोग के नज़दीक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कहा है कि दोनों देश असैनिक परमाणु सहयोग के काफ़ी क़रीब हैं लेकिन अभी दोनों पक्षों को 'काफ़ी कुछ काम' करने की ज़रूरत है. ज़्याक शिराक ने यह बात ऐसे मौक़े पर कही है जब वह कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं. शिराक ने भारतीय समाचार पत्रिका इंडिया टुडे के साथ एक ख़ास बातचीत में यह भी कहा है कि भारत को परमाणु सामग्री की आपूर्ति करने वाले देशों के गुट एनएसजी में मान्यता दिलाना फ्रांस के लिए प्राथमिकता का काम है. शिराक 19 फ़रवरी को भारत की तीन दिन की यात्रा पर राजधानी दिल्ली पहुँचने वाले हैं. शिराक ने कहा कि फ्रांस ऐसा पहला देश रहा है जिसने परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष लिया और उसे एक ज़िम्मेदार शक्ति बताया जिसके पास असैनिक परमाणु तकनीक है. ज़्याक शिराक ने कहा कि 18 जुलाई 2005 को अमरीका और भारत के बीच परमाणु समझौते के बाद फ्रांस ने इस मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत शुरू की थी और यह अमरीकी प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण देशों के सहयोग से आज भी जारी है. शिराक ने कहा, "हम परमाणु समझौते के काफ़ी नज़दीक हैं लेकिन दोनों पक्षों को अभी काफ़ी कुछ करना बाक़ी है." यह पूछे जाने पर कि क्या इस देरी के लिए वह भारत को ज़िम्मेदार मानते हैं, शिराक ने कहा, "चूँकि यह बहुपक्षीय मुद्दा है, फ्रांस मज़बूती से भारत के साथ खड़ा है." | इससे जुड़ी ख़बरें काकोडकर की चिंताओं पर विचार09 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'लक्ष्मण रेखा पार न करे सरकार'05 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत-ईरान रिश्तों पर असर पड़ेगा'04 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'मलफ़ोर्ड के बयान में कांग्रेस की भावना'26 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस मलफ़र्ड को लेकर राजनीति गरमाई30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान पर भारतीय रूख़ पर अमरीकी नज़र25 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका परमाणु संधि जटिल20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर सहमति की कोशिश19 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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