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'लक्ष्मण रेखा पार न करे सरकार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान मसले पर भारत सरकार के रुख़ के प्रति अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए वामदलों ने कहा है कि ऐसे मसलों पर निर्णय के लिए संविधान में संशोधन का प्रस्ताव लाना चाहिए ताकि ऐसे सवालों पर संसद में चर्चा के बाद ही सरकार अपना पक्ष रखे. बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम, 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में ईरान मसले पर वामदलों की बात रखते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को अपनी लक्ष्मण रेखा को ध्यान में रखना चाहिए. येचुरी ने कहा, "ईरान मसले पर स्थिति गंभीर है. सरकार चलाने की लक्ष्मण रेखा न्यूनतम साझा कार्यक्रम है. सरकार इस मसले पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन कर रही है और उसे लाघंने का परिणाम वे जानते हैं." उन्होंने कहा, "ईरान मसले पर हमारे बीच परेशानियां बढ़ी हैं. न्यूनतम साझा कार्यक्रम में स्वतंत्र विदेश नीति बनाने और निर्गुट देशों के साथ भारत के संबंधों को ध्यान में रखने की बात कही गई थी. यह बात सरकार को याद रहनी चाहिए." वामनेता येचुरी ने स्वीकारा कि सरकार वामदलों की बात को पूरी तरह से नहीं मान रही है. प्रस्ताव जल्दबाज़ी भारत में विदेश नीति के जानेमाने विशेषज्ञ हामिद अंसारी ने भी ईरान मसले को इतनी जल्दी सुरक्षा परिषद में पहुँचा देने की कार्यवाही को ग़लत ठहराया. उन्होंने कहा, "सुरक्षा परिषद में इसे ले जाने की जगह मसले का बातचीत से हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए थी. एक बार सुरक्षा परिषद में कोई बात पहुँच जाने के बाद वह और भी पेचीदा हो जाती है क्योंकि इसमें काफ़ी समय लगता है." अंसारी ने कहा, "हैदराबाद का मामला 1947 में सुरक्षा परिषद में गया था जो कि 1994 में हल हो सका. वैसे ही कश्मीर का मसला भी 1948 से लंबित पड़ा है. यानी एक बार जो चीज़ सुरक्षा परिषद के बहीखाते में चढ़ गई, वो लंबी खिंच जाती है." अंसारी मानते हैं कि इस मसले पर जब आईएईए की रिपोर्ट का आना बाकी था और इस बारे में मार्च में निर्णय होना था तो ऐसे में पहले से प्रस्ताव लाने की क्या ज़रूरत थी और उसे सुरक्षा परिषद में भेजना भी एक जल्दबाज़ी भरा फ़ैसला था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'परमाणु एजेंसी के साथ सहयोग नहीं'05 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान मामले पर संसद में बहस की मांग05 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'कूटनीतिक प्रयास ख़त्म नहीं हुए हैं'04 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ईरान परमाणु केंद्रों की निगरानी रोकेगा04 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना आईएईए के निर्णय पर प्रतिक्रियाएँ04 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना आईएईए के प्रस्ताव की मुख्य बातें04 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान पर मसौदा देखकर रुख़ तय करेंगे'01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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