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अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के दफ़्तर में धमाका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में पहली बार सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम पर नज़र रखने वाले निरीक्षकों को निशाना बनाया गया है. देश में बढ़ रही हिंसा के बीच, पूर्वी बाटिकोलोआमें उनके दफ़्तर में धमाका हुआ है. इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ लेकिन कई वाहनों को क्षति पहुँची है. ये घटना तब हुई है जब एक ही दिन पहले निरीक्षकों ने दोनो पक्षों के बीच बढ़ रहे संघर्ष पर एक कड़ा बयान जारी किया था. बीबीसी संवाददाता डमीथा लूथ्रा का कहना है पिछले चार साल से ये निरीक्षक संघर्षविराम पर नज़र रख रहे हैं लेकिन ये पहला मौका है कि उन्हें निशाना बनाया गया है. उनके अनुसार इस घटना के बाद हिंसा का स्तर बढ़ गया है. निरीक्षकों ने अपने बयान में दोनो ही पक्षों को बढ़ रही हिंसा के लिए दोषी ठहराया था और आगाह किया था कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, वे बातचीत दोबारा शुरु करें. वर्ष 2002 में सरकार और तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के बीच संघर्षविराम के बाद, पिछले महीने में सबसे अधिक हिंसा हुई है. सौ ज़्यादा लोग मारे गए हैं और सरकार ने एलटीटीई पर कई हमले करने का आरोप लगाया है. वे इसका खंडन करते हैं. उधर तमिल विद्रोहियों ने सरकार और सरकार समर्थित लड़ाकों पर तमिल नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. कई हलकों में ये चिंता व्यक्त की जा रही है कि श्रीलंका में स्थित गृह युद्ध की ओर बढ़ रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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