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'उमा प्रतिवेदन करें तो वापसी पर विचार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि पार्टी से निष्कासित नेता उमा भारती पार्टी में शामिल होने के लिए प्रतिवेदन करें तो उस पर निश्चित रुप से विचार होगा. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा जिस राजनीतिक विचारधारा और दर्शन के साथ बनी थी उस पर अभी तक क़ायम है. राजनाथ सिंह ने इस बात का खंडन किया कि दूसरी पीढ़ी के नेताओं के बीच पार्टी में किसी तरह की खींचतान है. उनका कहना था कि अध्यक्ष पद पर वे सर्वसम्मति से बैठे हैं और प्रमोद महाजन, अरुण जेटली से लेकर वेंकैया नायडू तक सभी का सहयोग उन्हें मिल रहा है. उमा भारती से जुड़े सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा, "उनको पार्टी से निष्कासित करने का फ़ैसला मेरे आने से पहले पार्टी के संसदीय बोर्ड ने सर्वसम्मति से लिया था और पार्टी में काम करने के लिए जो मर्यादाएँ निर्धारित की जाती हैं, जो लक्ष्मण रेखा खींची जाती है उसका अतिक्रमण होने पर कई बार न चाहते हुए भी कठोर फ़ैसले करने पड़ते हैं." उमा भारती को पार्टी में वापस लेने के सवाल पर पार्टी के नए अध्यक्ष ने कहा, "यदि उमा भारती की ओर से कोई प्रतिवेदन प्राप्त होगा, यदि कोई रिप्रेज़ेंटेशन प्राप्त होगा तो संसदीय बोर्ड उस पर निश्चित रुप से विचार करेगा." आरएसएस का दबाव एक सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा कि न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कोई दबाव पार्टी पर रहा है और न भविष्य में रहेगा. उन्होंने कहा, "मैं एक स्वयंसेवक हूँ और यदि हमारे सामने कोई समस्या आती है तो स्वयंसेवक होने के नाते दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था से राय-परामर्श ज़रुर करते हैं.संघ की राय को मानना न मानना भाजपा पर निर्भर करता है." हाल ही में पद संभालने वाले राजनाथ सिंह से एक श्रोता ने पूछा कि हिंदुत्व की उनकी परिभाषा क्या है तो उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि हिंदुत्व जीवन का एक दृष्टिकोण है और जीवन का मूलमंत्र है. उनका कहना था कि हिंदुत्व इंसान और इंसान के बीच नफ़रत करना नहीं सिखाता. जिन्ना प्रकरण को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा कि यह प्रकरण अब ख़त्म हो गया है और जैसा लालकृष्ण आडवाणी ने मुंबई में पत्रकारवार्ता में कहा था कि इस मुद्दे को जिस तरह से संप्रेषित किया जाना चाहिए था, नहीं किया जा सका. धर्मनिरपेक्षता धर्मनिरपेक्षता के सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा कि वे वामपंथी दलों और कांग्रेस को छद्म धर्मनिरपेक्ष पार्टी मानते हैं क्योंकि इन्होंने धर्म का इस्तेमाल तुष्टिकरण के लिए किया, राजनीति के लिए किया. इसके लिए उन्होंने शाहबानो प्रकरण और आँध्र प्रदेश में मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए किया गया. उनका कहना था कि भाजपा को वे सही धर्मनिरपेक्ष पार्टी कहते हैं. उन्होंने कहा, "हमारा कहना है कि राजनीति का आधार तुष्टिकरण नहीं न्याय और इंसाफ़ होना चाहिए और इसका उपयोग देश को बनाने के लिए होना चाहिए." मुद्दों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विचारधारा पर क़ायम है और जनजीवन के हितों से जुड़े मुद्दों पर वह विपक्ष में रहकर विचारधारा के अनुसार काम करती रहेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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