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'पार्टी विचारधारा पर क़ायम है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी का रजत जयंती अधिवेशन पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के इस वक्तव्य के साथ ख़त्म हुआ कि पार्टी की विचारधारा में कोई कमी नहीं है और जो कुछ कमियाँ हैं वो व्यक्तिगत कमियाँ हैं. अधिवेशन पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी के संबोधन के बिना ख़त्म हो गया. अटल बिहारी वाजपेयी ने इस अधिवेशन के बीच सिर्फ़ एक आमसभा में संक्षिप्त सा भाषण दिया जिसमें उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा की. उल्लेखनीय है कि पार्टी का अधिवेशन ऐसे समय में हुआ जब लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी की विचारधारा के साथ समझौते के संघ के आरोप के कारण अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ रहा है और पार्टी को अनुशासन से लेकर भ्रष्टाचार जैसे कई मुद्दों पर संकट का सामना करना पड़ रहा है. जैसा कि लालकृष्ण आडवाणी ने घोषणा कर रखी है वो 31 दिसंबर को पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने जा रहे हैं. पार्टी के रजत जयंती अधिवेशन में देश भर से चार हज़ार पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाग लिया. हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोप में संसद से बर्खास्त सांसदों को इस अधिवेशन में आने से रोक दिया गया था. मीडिया पर नसीहत पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने अधिवेशन के अंतिम दिन भाषण करते हुए कहा कि किसी भी कार्यकर्ता को यह नहीं सोचना चाहिए कि पार्टी ने अपने मुद्दे भुला दिए हैं. उन्होंने कहा, "पार्टी हिंदुत्व से लेकर राम मंदिर और धारा 370 तक के सभी मुद्दों पर क़ायम है लेकिन सिर्फ़ यही पार्टी के मुद्दे नहीं हैं. पार्टी इससे ज़्यादा बड़े मुद्दों पर काम करती है और वह है भारतीय संस्कृति." वाजपेयी की अनुपस्थिति में समापन भाषण करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने दोहराया कि पार्टी के 25 वर्ष जहाँ गर्व पैदा करने वाले रहे हैं वहीं पिछले 25 हफ़्ते कष्ट देने वाले रहे हैं. उन्होंने अपने कष्ट का विवरण देते हुए सांसदों के भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया और कहा कि इससे शर्मिंदगी तो होती ही है. उनका कहना था कि देश में किसी भी पार्टी में ताक़त नहीं है कि भाजपा के ख़िलाफ़ बॉलिंग कर सके और जब भी पार्टी आउट होगी तो हिट विकेट आउट होगी. पार्टी के नेताओं के टेलीविज़न पर आने वाले बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आडवाणी ने कहा कि देश भर में पार्टी के सभी नेताओं को तय करना होगा कि पार्टी प्रवक्ता के अलावा कोई भी मीडिया से बात नहीं करेगा. उन्होंने अख़बारों यानी प्रिंट मीडिया के बारे में कहा, "प्रिंट मीडिया टेलीविज़न के युग में अपने आप में बदलाव नहीं ला पाया है." उनका आरोप था कि मीडिया ग़ैरज़रुरी छोटे बयानों को बड़ा करके प्रकाशित करता है. इससे पहले वेंकैया नायडू ने भी मीडिया को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं को ख़ासी नसीहतें दीं. वाजपेयी की अनुपस्थिति
पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी के कार्यकर्ता अधिवेशन के दौरान नहीं सुन सके. अधिवेशन के पहले दिन ही घोषणा कर दी गई थी कि वाजपेयी का भाषण समापन समारोह में होगा और वे समापन सत्र में मंच पर आकर बैठे भी थे लेकिन वे बीच से उठकर चले गए. उनकी अनुपस्थिति में लालकृष्ण आडवाणी ने समापन भाषण भी दिया. बाद में पार्टी महासचिव प्रमोद महाजन ने सूचना दी कि मंच पर गर्मी अधिक होने की वजह से वाजपेयी की तबियत ख़राब हो गई है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बहुत अस्वस्थ नहीं हैं और कुछ देर आराम करने के बाद शाम को वापस दिल्ली जा रहे हैं. बाद में प्रमोद महाजन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना के समय वाजपेयी ने संगठन, संघर्ष और संरचना का त्रिसूत्रीय फ़ार्मूला दिया था. उन्होंने कहा, "वाजपेयी जी के इसी फ़ार्मूले पर पार्टी 25 साल चलती रही यदि वे आकर रजत जयंती समारोह में नई सदी के लिए नया सूत्र दे पाते तो कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन मिलता." | इससे जुड़ी ख़बरें वाजपेयी के भाषण बिना ही अधिवेशन ख़त्म30 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'पार्टी के हिसाब से चलेंगे वाजपेयी'30 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'सत्ता की राजनीति' नहीं करेंगे वाजपेयी29 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से सन्यास लिया29 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हिंदुत्व की ओर लौटने का ज़िक्र नहीं29 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आडवाणी ने कांग्रेस पर निशाना साधा28 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अधिवेशन में कई चीज़ें अलग सी हैं28 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा का रजत जयंती अधिवेशन शुरू26 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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