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हिंदुत्व की ओर लौटने का ज़िक्र नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भारी दबाव और पार्टी के कुछ नेताओं की मांग के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुत्व और राम मंदिर के अपने मूल मुद्दे पर लौटने से इनकार कर दिया है. संघ के दवाब के बावजूद अपने राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा ने न तो हिंदुत्व का ज़िक्र किया है और न राम मंदिर का. कम से कम ज़ाहिर तौर पर तो पार्टी इन मुद्दों पर नहीं लौट रही है क्योंकि इसे राष्ट्रीय परिषद में पारित प्रस्ताव का हिस्सा नहीं बनाया गया है. हालांकि राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी ने सिंद्धांतों पर लौटने की बात तो की है लेकिन उसने साफ़ कर दिया है कि वह भविष्य गठबंधन की राजनीति में ही देखती है. शायद इसीलिए एनडीए में शामिल दलों को नाराज़ करने वाला कोई क़दम नहीं उठाना चाहती. रजत जयंती अधिवेशन में राजनीतिक प्रस्ताव का जवाब देते हुए पार्टी महासचिव सुषमा स्वराज ने कहा कि चर्चा के दौरान कुल 67 संशोधन आए. उन्होंने बताया कि सबसे अधिक सुझाव जम्मू कश्मीर पर यूपीए सरकार की नीति का विरोध करने और धर्मांतरण का विरोध करने को प्रस्ताव में शामिल करने के आए और इन्हें प्रस्ताव में शामिल किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने पार्टी के उपाध्यक्ष कल्याण सिंह और गुजरात के नेता चावड़ा की उस मांग का कोई ज़िक्र नहीं किया जिसमें कहा गया था कि पार्टी को हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे को भी प्रस्ताव का हिस्सा बनाना चाहिए.
पार्टी महासचिव सुषमा स्वराज ने कल्याण सिंह के उस मुद्दे का भी कोई ज़िक्र नहीं किया जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी में दलितों और पिछड़ों को पर्याप्त अवसर दिए जाने की ज़रुरत है. बाद में बीबीसी से बात करते हुए पार्टी के एक अन्य उपाध्यक्ष थावरचंद गहलोत ने पार्टी का बचाव करते हुए कहा, "कल्याण सिंह ने संशोधन नहीं रखे थे, सुझाव दिए थे और पार्टी उन पर विचार करेगी." सुषमा स्वराज ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के उस संशोधन को स्वीकार किया जा रहा है जिसमें बुधवार को बंगलौर में हुई चरमपंथी घटना की निंदा की गई है और इसके लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया गया है. भ्रष्ट सांसदों से शर्मिंदगी राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने इस प्रस्ताव को अंतिम रुप दिया था और भाजपा राष्ट्रीय परिषद में इस पर तीन घंटे चर्चा के बाद इसे पारित किया गया. इस प्रस्ताव में भ्रष्टाचार के मामले में पार्टी के सांसदों के पकड़े जाने पर ‘शर्म’ का तो इज़हार किया गया है लेकिन जिस तरह उन्हें संसद से निकाले जाने की जो कार्रवाई हुई उसे पार्टी ने पक्षपातपूर्ण बताया है. प्रस्ताव रखते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए पकड़े गए 11 सांसदों में से यदि एक भी सांसद पार्टी का नहीं होता तो पार्टी के लोग आज गर्व से सिर ऊँचा करते चलते. पार्टी ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार के इन मामलों की तुलना में प्रश्न के बदले पैसा लेने वाले 11 सांसदों पर कार्रवाई करने में जो तत्परता दिखाई गई है उसमें अंतर दिखता है. पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया है, "भ्रष्टाचार का विरोध पक्षपात के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए." कांग्रेस पर हमला प्रस्ताव में यूपीए सरकार, कांग्रेस और वामपंथी दलों की जमकर निंदा की गई है. राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है. 'वोल्कर समिति की रिपोर्ट' और 'मित्रोखिन आर्काइव्स' का ज़िक्र करते हुए पार्टी ने कहा है कि सरकार की ओर से इस पर पर्दा डालने का काम किया गया है. यूपीए सरकार की निंदा करते हुए पार्टी ने कहा है कि सरकार अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों का विभाजन करके समाज का विभाजन कर रही है. केंद्र की सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों के बारे में प्रस्ताव में कहा गया है कि उनकी प्रतिबद्धता लोकतांत्रिक संस्थाओं में नहीं है. उनके बारे में भाजपा का प्रस्ताव कहता है, "वो सरकार पर समय देखकर भौंकते हैं लेकिन कभी काटते नहीं." कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर सीधा हमला करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, "सोनिया गाँधी अपने कार्यकर्ताओं से कांग्रेस का भाजपाईकरण रोकने की बात कह रही हैं लेकिन उनमें ऐसा करने की कुव्वत ही नहीं है." उन्होंने कहा कि इसके लिए परिवारवाद को ख़त्म करना होगा और पार्टी में क़ाबिलियत के आधार पर नेता चुनना होगा. पार्टी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि यूपीए गठबंधन के विकल्प के रुप में एनडीए को तैयार रहना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें अधिवेशन में कई चीज़ें अलग सी हैं28 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आडवाणी ने कांग्रेस पर निशाना साधा28 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस जोशी का आडवाणी पर दबाव से इनकार27 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा अधिवेशन में अध्यक्ष मुद्दा27 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'संघ के कारण है भाजपा'26 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा का रजत जयंती अधिवेशन शुरू26 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस बिखर सकता है भाजपा का राष्ट्रीय स्वरूप24 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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