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शनिवार, 31 दिसंबर, 2005 को 15:26 GMT तक के समाचार
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आडवाणी हटे, राजनाथ अध्यक्ष

राजनाथ सिंह और लालकृष्ण आडवाणी
अध्यक्ष के रूप में आडवाणी का ये कार्यकाल मुश्किलों भरा रहा है
भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तीन महीने पहले की गई अपनी घोषणा के अनुसार ही 31 दिसंबर को पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया.

राजनाथ सिंह को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया गया है.

राजनाथ सिंह दो जनवरी को दिल्ली में पार्टी के मुख्यालय में औपचारिक रुप से पदभार संभालेंगे.

लालकृष्ण आडवाणी ने यह तो कहा कि पद छोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई दबाव नहीं था लेकिन उन्होंने इस सवाल का जवाब टाल दिया कि वे क्यों पद छोड़ रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन ने ही सबसे पहले उम्र का हवाला देते हुए आडवाणी को पद छोड़ने का सुझाव दिया था.

बाद में पाकिस्तान के दौरे के दौरान जिन्ना पर दिए गए उनके बयान के बाद संघ ने उन पर सिद्धांतों के ख़िलाफ़ जाने का आरोप लगाते हुए पद छोड़ने का दबाव बनाया था.

 पार्टी के लोगों का आईक्यू (इंटेलिजेंट कोशेंट) तो अच्छा है लेकिन उनका ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) छोटा होने की वजह से ईर्ष्या और द्वेष जैसी समस्याएँ सामने आती हैं.
लालकृष्ण आडवाणी

आडवाणी ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा करने के लिए मुंबई के रजत जयंती नगर में बुलाई गई पत्रकारवार्ता में कहा कि वे पद छोड़ते हुए राहत महसूस कर रहे हैं.

अपनी हिंदुत्ववादी राजनीति और रथयात्राओं से पार्टी को नई पहचान देने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने शनिवार को इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि वे हिंदूवादी आडवाणी हैं या फिर जिन्नावादी आडवाणी.

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे और पार्टी जो दायित्व उन्हें सौंपेगी वह उसके लिए तैयार रहेंगे.

लालकृष्ण आडवाणी ने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि अटल बिहारी वाजपेयी के संन्यास की घोषणा के बाद अगले चुनावों में वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. लेकिन उन्होंने यह ज़रूर कहा कि इसका फ़ैसला पार्टी करेगी.

राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं

एक अन्य सवाल के जवाब में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जिन्ना पर जो कुछ उन्होंने कहा उसके बारे में उन्हें सिर्फ़ इस बात का अफ़सोस रहेगा कि वह पार्टी के लोगों को अपनी बात ठीक तरह से समझा नहीं सके.

जिन्ना प्रकरण उभरने के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने और फिर उसे वापस लेने के अपने निर्णय को राजनीतिक भूल मानने से भी उन्होंने इनकार किया.

अपेक्षा

भाजपा के रजत जयंती अधिवेशन के दौरान कही गई बात को दोहराते हुए उन्होंने फिर कहा कि पार्टी की विचारधारा में कोई कमी नहीं है और जो कमी है वह व्यक्तियों में है.

एकाधिक बार इस बात को दोहराने के बाद उन्होंने एक बार फिर कहा कि पिछले 25 हफ्ते कष्ट पहुँचाने वाले रहे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी के लोगों का आईक्यू (इंटेलिजेंट कोशेंट) तो अच्छा है लेकिन उनका ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) छोटा होने की वजह से ईर्ष्या और द्वेष जैसी समस्याएँ सामने आती हैं.

राजनाथ सिंह को उत्तराधिकार सौंपते हुए उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ कि पार्टी के सहयोगियों के साथ राजनाथ सिंह के नेतृत्व में पार्टी और ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगी.”

उत्तर प्रदेश में मंत्री, फिर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रुप में उनके अनुभव का ज़िक्र करते हुए आडवाणी ने कहा उन्हें विश्वास है कि पार्टी राजनाथ सिंह के नेतृत्व में छलांग लगाती हुई आगे बढ़ेगी.

राजनाथ सिंह

 यह पद नहीं दायित्व है और यह प्रतिष्ठा नहीं परीक्षा है.
राजनाथ सिंह

आडवाणी ने फूलमाला पहनाकर और लड्डू खिलाकर राजनाथ सिंह को नया अध्यक्ष घोषित किया.

इससे पहले उन्होंने औपचारिक रुप से अपना इस्तीफ़ा पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वेंकैया नायडू को सौंप दिया था.

इसके बाद राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी का 1980 का भाषण याद करते हुए कहा कि ‘यह पद नहीं दायित्व है और यह प्रतिष्ठा नहीं परीक्षा है’.

लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ़ करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी को आडवाणी ने नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया.

उन्होंने आडवाणी के सुराज, शुचिता और सुरक्षा के नारे के आधार पर काम करने की घोषणा की.

वहीं राजनाथ सिंह ने कहा, “पार्टी जिस विचारधारा और दार्शनिक अवधारणा के आधार पर बनी थी हम उसी विचारधारा और दार्शनिक अवधारणा के आधार पर आगे चलेंगे."

राजनाथ सिंह ने पत्रकारवार्ता में सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि वे सवालों के जवाब दो जनवरी को दिल्ली में देंगे.

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