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गुरुवार, 29 दिसंबर, 2005 को 14:00 GMT तक के समाचार
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84 के दंगापीड़ितों के लिए एक और राहत

1984 के दंगे
84 के दंगों में तीन हज़ार से भी ज़्यादा सिख मारे गए थे.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के राहत और पुनर्वास के लिए एक पैकेज को मंज़ूरी दे दी है.

714 करोड़, 76 लाख के इस राहत पैकेज का इस्तेमाल दंगापीड़ितों की मदद के लिए किया जाएगा.

कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि दंगों के दौरान जिन लोगों की जाने गईं थी, उनके परिजनों को प्रत्येक मृतक के हिसाब से साढ़े तीन लाख की राहत राशि दी जाएगी.

यह राहत राशि उस रक़म के अलावा है जो अब तक विभिन्न राज्य सरकारों ने मृतकों के परिवारों को दी है.

ग़ौरतलब है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के इन दंगों में तक़रीबन तीन हज़ार लोगों की जान गई थी.

इन दंगों की जाँच के लिए अभी तक एक दर्जन से भी ज़्यादा समितियां और आयोग बनाए जा चुके हैं.

इसी वर्ष अगस्त महीने में इन दंगों की जाँच के लिए बने नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की थी.

 प्रत्येक घायल को सवा लाख रूपए दिए जाएँगे और इसके अलावा जिन लोगों के घरों, दुकानों या कारखानों को नुकसान पहुँचा है, उन्हें 10 गुना अधिक मुआवज़ा दिया जाएगा
पी चिदंबरम, वित्तमंत्री-भारत सरकार

इस रिपोर्ट पर संसद में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि उन्हें 1984 के दंगों को लेकर सिख समुदाय से औऱ पूरे देश से माफ़ी माँगने में कोई झिझक नहीं है.

वित्तमंत्री ने बताया, "प्रत्येक घायल को सवा लाख रूपए दिए जाएँगे और इसके अलावा जिन लोगों के घरों, दुकानों या कारखानों को नुकसान पहुँचा है, उन्हें 10 गुना अधिक मुआवज़ा दिया जाएगा."

हालांकि वित्तमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि इन सभी मामलों में न्यायालय के आदेश के मुताबिक जो मुआवज़ा दिया जा चुका है, उसे केंद्र की ओर से दिए जाने वाले मुआवज़े में से घटा दिया जाएगा.

 यही काफ़ी नहीं है. इन अभियुक्तों को सज़ा दी जानी चाहिए. दंगों में कई लोग मारे गए थे जिसके लिए साढ़े तीन लाख रूपए, जिसमें भी यह कटौती की बात कर रहे हैं, सही नहीं है.
कुलदीप कौर, दंगापीड़ित महिला

वित्तमंत्री ने यह भी बताया कि 1984 के दंगा प्रभावित राज्यों से जो पीड़ित लोग पंजाब चले गए थे और अभी तक वहाँ रह रहे हैं, उन परिवारों को भी दो-दो लाख रूपए की राहत दी जाएगी.

इस फ़ैसले के बाबत जब 1984 के दंगा पीड़ितों से बातचीत की तो दंगों के दौरान विधवा हुई दो बेटों की माँ कुलदीप कौर ने इस मुआवज़े को नाकाफ़ी बताते हुए कहा, "यही काफ़ी नहीं है. इन अभियुक्तों को सज़ा दी जानी चाहिए. दंगों में कई लोग मारे गए थे जिसके लिए साढ़े तीन लाख रूपए, जिसमें भी यह कटौती की बात कर रहे हैं, सही नहीं है."

उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान हिंसा में कुछ लोगों को ज़्यादा चोट लगी तो कुछ को कम, ऐसे में सभी के लिए एक जैसी राहत राशि तय करना उचित नहीं है.

अन्य फ़ैसले

इसके अलावा जिन मुद्दों पर कैबिनेट ने निर्णय लिया है, उनमें दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार संधि को मंज़ूरी और जयपुर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा देने जैसे अहम फ़ैसले शामिल हैं.

कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद एक जनवरी,2006 से दक्षिण एशियाई देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार संधि लागू हो जाएगी.

साथ ही जयपुर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की कोशिश को जानकार पर्यटन क्षेत्र में एक प्रगति के तौर पर देख रहे हैं.

इसके अलावा यौनकर्मियों के पास आवागमन के लिए बनाए गए निषेध कानून में प्रस्तावित संशोधनों को भी मंज़ूरी दे दी गई है.

ग़ौरतलब है कि इस संशोधन का देशभर के यौनकर्मियों ने विरोध किया था और राजधानी दिल्ली में इसे लेकर प्रदर्शन भी हुए थे.

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