|
'ऐसी घटनाएँ फिर कभी नहीं होनी चाहिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों और गुजरात में हुए दंगों पर दुख व्यक्त किया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने कहा है कि देश में ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि ऐसी दर्दनाक घटनाएँ दोबारा कभी न हों. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये विचार दिल्ली में ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में व्यक्त किए. वे वहाँ अपनी पत्नी गुरुशरण कौर के साथ माथा टेकने गए थे. सन 1984 के सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में उन्होने कहा, "मैं सिखों का दर्द और उनकी भावना को समझता हूँ. समाज के सभी वर्गों को शांति और भाईचारा बनाए रखना चाहिए ताकि देश को समृद्धि की ओर ले जाया जा सके." उन्होंने सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का एक दोहा दोहराते हुए कहा कि यदि देश के हित के लिए उन्हें अपनी जान का बलिदान भी करना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे. गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरुशरण कौर का सम्मान 'सिरोपा' और किरपाण देकर किया गया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||