BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 22 दिसंबर, 2005 को 12:16 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सूनामी मृतकों की स्मृति में बनते स्मारक

सूनामी स्मारक
सूनामी में मारे गए बेग़ुनाह लोगों की याद में कई स्मारक बन रहे हैं
तमिलनाडु का तटीय ज़िला नागपट्टिनम पिछले साल आए सूनामी से सबसे अधिक प्रभावित रहा. इस ज़िले के छह हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े थे.

सूनामी की पहली वर्षगांठ पर नागपट्टिनम ज़िले में सूनामी में मारे गए लोगों की याद में अब जगह-जगह पर स्मारक बनाए जा रहे हैं.

यह स्मारक प्रशासन ही नहीं बल्कि निजी संस्थान और आम लोग भी अपने प्रियजनों की याद में बना रहे हैं.

नागपट्टिनम ज़िले के प्रशासनिक अधिकारी डॉ जे राधाकृष्णन ने बीबीसी को बताया कि 26 दिसंबर को कलेक्ट्रेट के प्रांगण में एक स्मारक का उदघाटन होगा.

इस स्मारक के तौर पर एक स्तंभ पर लगी घड़ी 26 दिसंबर, 2004 का वो समय दिखाएगी जब विनाशकारी लहरों ने नागपट्टिनम ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया के लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था.

उस समय हटाई गई एक टूटी नाव को भी प्रदर्शित किया गया है और साथ ही सीमेंट से बनाई गई एक लहर उस पूरे घटनाक्रम की याद ताज़ा करेगी.

अक्रपट्टई गाँव की वो तस्वीरें सबको याद होंगी जिसमें बड़ी-बड़ी नावों को बच्चों के खिलौने की तरह सूनामी लहरों ने इधर-उधर फेंक दिया था.

आज वहाँ पर गाँववासी एक स्मारक बना रहे हैं. एक मछुआरे पनीरवन ने कहा, " यह स्मारक हमें अपने प्रियजनों की याद दिलाएगा."

कई स्मारक

वैलनकनी अपने गिरजाघर के लिए सब जगह प्रसिद्ध है. इस गिरजाघर में ईसाईयों के साथ हिंदू भी बड़ी संख्या में जाते हैं. पिछले साल बड़े दिन के लिए इकट्ठा हज़ारों लोग वैलकनी में सुनामी के शिकार हुए थे.

 यह स्मारक हमें अपने प्रियजनों की याद दिलाएगा
पनीरवन, एक मछुआरा

नागपट्टिनम से वैलनकली के रास्ते में खेतों के नज़दीक तीन हज़ार लाखों को दफ़नाया गया था. आज इस सूनामी कब्रिस्तान के बीच वैलनकनी चर्च एक 53 फुट ऊँचे स्तंभ का निर्माण कर रहा है.

ग्रेनाइट का यह स्तंभ उन बेनाम लोगों की याद में बनाया जा रहा है जो उस दिन वैलनकनी गिरजाघर के निकट समुद्र तट पर मौजूद थे.

नागपट्टिनम के लाइट-हाउस के निकट समुद्र के किनारे जो स्मारक बने हैं, वे भावुक करते हैं.

अर्थपेट्टू स्ट्रीट नाम के गाँव के 375 लोग सूनामी में मारे गए थे. कई बच्चों को समुद्र के किनारे दफ़ना दिया गया था. यह रंग-बिरंगे छोटे स्मारक उन बच्चों की याद में बनाए गए हैं.

32 वर्षीया पुनीता अपने पति के साथ ऐसे ही एक स्मारक के बगल में बैठी थी. उनके दो छोटे बच्चे वहाँ दफ़नाए गए थे.

छोटे से स्मारक में उन मृत बच्चों की तस्वीर के साथ उसने दूध और खाना वहाँ रखा था. हर दिन वो अपने पति के साथ आकर वहाँ अपने बच्चों के साथ 'दिन बिताती' हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
मौसम का मिज़ाज समझने की पहल
20 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
'दो तिहाई लोग काम पर लौट चुके हैं'
20 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
एक साल बाद भी नहीं हो पाई पहचान
19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सूनामी का दर्द, उस पर बाढ़ की मार
19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
ऐसे दिया मौत को चकमा
18 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>