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सोमवार, 14 नवंबर, 2005 को 10:04 GMT तक के समाचार
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जहानाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
जहानाबाद के बाहर पुलिसकर्मी
पुलिस प्रशासन ने स्वीकार किया है कि उन्हें माओवादियों ने हमले की भनक थी
बिहार के जहानाबाद में माओवादी चरमपंथियों के जेल पर हमले के बाद सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती कर सुरक्षा इंतज़ाम कड़े कर दिए गए हैं.

केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था में खामी को स्वीकार करते हुए भी सुरक्षाबलों के दस्ते और दो हेलीकॉप्टर भेजने का निर्णय लिया है.

रविवार की रात जहानाबाद की जेल में माओवादी चरमपंथियों ने हमला किया था और कुछ माओवादी नेताओं को छुड़ा कर ले गए थे.

ख़बरें हैं कि माओवादी अपने साथ रणवीर सेना के कुछ लोगों को अपने साथ ले गए हैं और इसे लेकर जहानाबाद में तनाव की स्थिति है.

ख़बरें एकत्रित करने पहुँचे पत्रकारों पर सोमवार की सुबह पुलिस ने लाठीचार्ज किया है जिसमें कैमरे टूट गए और कई पत्रकार घायल हो गए.

सुरक्षा व्यवस्था

उल्लेखनीय है कि रविवार रात नौ बजे भारी संख्या में माओवादी चरमपंथियों ने राजधानी पटना से 60 किलोमीटर दूर जहानाबाद ज़िले के मुख्यालय पर धावा बोल दिया.

प्रशासन ने जेल पर हमले का विवरण देते हुए कहा है कि जेल पर हुए हमले के बाद जेल में बंद 658 क़ैदियों में से 341 भाग गए हैं.

बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने जहानाबाद से ख़बर दी है कि जेल का दरवाज़ा जो माओवादी चरमपंथी रविवार की रात खुला छोड़ गए थे वो सुबह तक खुला हुआ था और कोई भी वहाँ आ-जा सकता था.

प्रशासन का कहना है कि माओवादी मगध रेंज के एरिया कमांडर अजय कानू और अपने कुछ अन्य साथियों को जेल से अपने साथ ले जाने में सफल रहे.

इस बीच ख़बरें मिली हैं कि माओवादियों ने कैदियों का नाम पता पूछ-पूछकर कोई 20 लोगों को अपने साथ ले गए हैं जिनके बारे में उन्हें संदेह था कि वे रणवीर सेना से संबंधित हो सकते हैं.

बताया जा रहा है कि इन लोगों में रणवीर सेना के एक नेता बड़े शर्मा की जेल परिसर में ही गोलीबारी से मौत हो गई.

हालांकि अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं.

तनाव

लेकिन इस ख़बर के कारण जेल के आसपास सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जेल के आसपास एकत्रित हो गए और जेल प्रशासन-ज़िला प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये लोग कथित तौर पर रणवीर सेना के समर्थक हैं.

उनका आरोप है कि जेल प्रशासन और ज़िला प्रशासन ने जानबूझकर माओवादियों को जेल पर हमला करके भागने का रास्ता दिया.

 अब हम छोटी मोटी घटनाओं से आगे जाना चाहते हैं और अब हम देश भर की जेलों से अपने साथियों को रिहा कराएँगे
एसडी मौर्या, माओवादी नेता

उधर राज्य में प्रतिबंधित रणवीर सेना के प्रवक्ता शमशेर बहादुर सिंह ने बीबीसी संवाददाता रूपा झा से हुई बातचीत में कहा है कि उनके चार सदस्यों को माओवादी उठाकर ले गए हैं.

उन्होंने कहा कि उन लोगों ने वामपंथी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ युद्दविराम कर रखा था लेकिन अब उन्हें 24 घंटों की मोहलत दे रही है कि वे अगुवा किए गए उनके सदस्यों को लौटा दे.

रणवीर सेना ने कहा है कि इसके बाद वो हिंसा के रास्ते पर लौट आएगी.

दूसरी ओर माओवादी नेता एसडी मौर्या ने बीबीसी से कहा, "अब हम छोटी मोटी घटनाओं से आगे जाना चाहते हैं और अब हम देश भर की जेलों से अपने साथियों को रिहा कराएँगे."

उन्होंने दावा किया कि जहानाबाद की जेल से उन्होंने रणवीर सेना के 50 सदस्यों को अगवा कर लिया है.

माओवादी नेता मौर्या का कहना था कि रास्ते में आने वाली सभी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी रखी जाएगी.

केंद्रीय सहायता

राष्ट्रपति शासन वाले बिहार के जहानाबाद की घटना के बाद केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है.

केंद्रीय गृहसचिव वीके दुग्गल ने दिल्ली में स्वीकार किया कि राज्य प्रशासन को इस हमले की सूचना थी और जो कुछ हुआ वह क़ानून व्यवस्था की खामी है.

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा है कि जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार है उसे जवाब देना होगा.

गृहसचिव ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार में सुरक्षा के लिए सुरक्षाबलों के आठ से दस दस्ते और दो हेलिकॉप्टर भेजे जाएँगे.

पत्रकारों पर लाठी

इस घटना की ख़बरें एकत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पत्रकार जहानाबाद पहुँचे हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार सोमवार की सुबह ज़िलाधीश के साथ आए सुरक्षाकर्मियों ने जब कुछ पत्रकारों को रोकने की कोशिश की तो धक्कामुक्की शुरु हो गई और इसके बाद पुलिस ने पत्रकारों पर लाठीचार्ज कर दिया गया.

इसमें कई पत्रकारों को चोटें आई हैं और कई टेलीविज़न चैनलों के कैमरे टूट गए हैं.

इस घटना से नाराज़ पत्रकारों ने प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

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