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नेपाल को चीनी सहायता पर चिन्ता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने नेपाल को चीन की सैन्य सहायता की ख़बरों पर चिंता जताई है. नेपाल में अमरीका के राजदूत जेम्स मोरियाटरी ने कहा है कि यह अच्छा संकेत नहीं है. ग़ौरतलब है कि हाल ही में नेपाल के सेना प्रमुख के हवाले से ये ख़बरें आईं थीं कि चीन नेपाल को सैन्य सामग्री ख़रीदने के लिए दस लाख डॉलर की सहायता देने पर सहमत हो गया है. अमरीकी राजदूत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका देश चीनी सहायता पर नज़र रखे हुए है. उनका कहना था कि नेपाल किसी भी देश से हथियार ख़रीदने के लिए स्वतंत्र है लेकिन मौजूदा समय में चीन से हथियार ख़रीदना कोई अच्छा संकेत नहीं है. इसके पहले मंगलवार को नेपाली सेना के प्रमुख प्यारजंग थापा ने कहा था कि चीन दस लाख डॉलर की सैन्य सहायता देने पर सहमत हो गया है. जनरल थापा ने यह घोषणा चीन का एक सप्ताह का दौरा करने के बाद की. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालांकि चीन की यह सहायता बड़ी नहीं है लेकिन इसे कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नेपाल में फ़रवरी में महाराज ज्ञानेंद्र के सत्ता संभालने के बाद अमरीका,ब्रिटेन और भारत ने विरोध स्वरूप सैन्य सहायता स्थगित कर दी थी. जबकि चीन ने इसे नेपाल का आंतरिक मामला क़रार दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका ने नेपाल को सावधान किया16 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस ज्ञानेंद्र का लोकतंत्र बहाली का आश्वासन23 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल आपातकाल ख़त्म करे: भारत22 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में ग्रामीण सुरक्षा बलों की निंदा03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश ने सरकार बर्ख़ास्त की01 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस ज्ञानेंद्र का "दुस्साहसिक" कदम 01 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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