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गुरुवार, 20 अक्तूबर, 2005 को 11:12 GMT तक के समाचार
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मृत्युदंड पर एक बार फिर विवाद
नाटा मलिक जो कोलकाता में मौत की सज़ा देते हैं
मौत की सज़ा का विरोध करने वाले मानते हैं कि इस सज़ा में सुधार की गुंजाइश नहीं होती
मौत की सज़ा होनी चाहिए या नहीं इसको लेकर भारत में हमेशा वाद-विवाद रहा है. यह विवाद एक बार फिर सतह में आ गया है.

इस बार विवाद राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की उस सलाह से शुरु हुई है जिसमें उन्होंने भारत सरकार से कहा है कि ज़्यादातर अपराधियों की मौत की सज़ा माफ़ कर दी जाए.

और इस विवाद को आगे बढ़ाया है देश के भावी मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल ने जिन्होंने कहा कि मृत्युदंड का प्रावधान तो क़ानून में है लेकिन वे व्यक्तिगत रुप से इसके ख़िलाफ़ हैं.

दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने गत सोमवार को एक ख़बर प्रकाशित की थी.

इसके अनुसार राष्ट्रपति कलाम ने भारत सरकार से कहा है कि जिन लोगों को अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है और जिन लोगों ने उनके पास सज़ा माफ़ी का आवेदन भेजा है उन सभी की मौत की सज़ा माफ़ कर दी जाए.

ख़बरें हैं कि उनके पास सज़ा माफ़ी के लिए कोई 20 आवेदन हैं.

क़ानून के अनुसार राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में बदलने का अधिकार है.

व्यक्तिगत राय

अगले महीने से भारत के मुख्य न्यायाधीश होने जा रहे न्यायमूर्ति वाईके सभरवाल से पूछा गया था कि वे क्या वे राष्ट्रपति की राय से सहमत हैं?

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में कहा, "जहाँ तक सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की तरह मेरी राय का सवाल है तो मैं मानता हूँ कि भारतीय दंड विधान के तहत दुर्लभ से दुर्लभ मामले में ही मौत की सज़ा दी जानी चाहिए."

लेकिन उन्होंने कहा है कि वे एक नागरिक की हैसियत से मानते हैं कि मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए.

उनका कहना था कि जब तक भारतीय दंड विधान में मौत की सज़ा का प्रावधान है तब तक इस बात का कोई महत्व नहीं है कि किसी न्यायाधीश की व्यक्तिगत राय क्या है.

राष्ट्रपति की राय पर विवाद

राष्ट्रपति के पास ऐसे 20 लोगों के आवेदन भेजे गए थे जिनको मौत की सज़ा सुनाई गई है.

अब्दुल कलाम
राष्ट्रपति के पास मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में बदलने का अधिकार है

राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृहमंत्रालय को राय दी है कि ज़्यादातर लोगों की सज़ा माफ़ कर उसे उम्रक़ैद में तब्दील कर देना चाहिए.

हालांकि इस पर गृहमंत्रालय की कोई अधिकृत प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस ख़बर की कई जगह प्रतिक्रिया हुई है.

राष्ट्रपति की इस राय से नाराज़ होने वालों में एक परिवार के लोग हैं जिसके 17 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और इसके आरोप में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है.

उन 20 आवेदनों में चार आवेदन इन लोगों के भी थे.

माडिया में आई ख़बरों के अनुसार इस परिवार का कहना है कि हत्या करने वालों की सज़ा सिर्फ़ मौत होनी चाहिए. परिवार के सदस्यों ने मौत की सज़ा माफ़ किए जाने की स्थिति में आत्महत्या कर लेने की धमकी भी दी है.

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