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अफ़ग़ानिस्तान में फिर शुरू हुआ मृत्युदंड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के पतन के बाद पहली बार किसी व्यक्ति को मौत की सज़ा दी गई है. पिछले सप्ताह हत्या के दोषी एक पूर्व सैनिक कमांडर अब्दुल्ला शाह को काबुल से कुछ दूर एक जेल के बाहर गोली से उड़ा दिया गया. हालाँकि इसकी जानकारी मंगलवार को ही मिल पाई. अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इस सज़ा को अपनी स्वीकृति दी थी. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि अब्दुल्ला शाह को करज़ई सरकार ने बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं दी थी. संगठन का कहना है, "हमें डर है कि मौत की सज़ा के पीछे कई राजनीतिक खिलाड़ी शामिल हैं जो मानवाधिकार उल्लंघन के एक प्रमुख गवाह को ज़िंदा नहीं देखना चाहते थे." आपराधिक रिकॉर्ड अफ़ग़ानिस्तान में 1992-96 तक चले गृह युद्घ के दौरान अब्दुल्ला शाह एक अन्य सैनिक कमांडर ज़रदाद के अधीन काम करता था. 1990 के दशक में जलालाबाद और काबुल के बीच की सड़कों पर यात्रियों पर हमलों के पीछे अब्दुल्ला शाह का हाथ ही माना जाता है. काबुल से बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नॉर्थ का कहना है कि इतनी देर से इस मृत्युदंड के ख़ुलासे से ही यह ज़ाहिर हो जाता है कि सरकार इस मामले पर अपनी आलोचना को लेकर कितनी गंभीर थी. अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि अब्दुल्ला शाह पर हत्या के 20 मामले एक विशेष अदालत में साबित हुए थे.
उसे अपनी एक पत्नी की उसके शरीर पर खौलता पानी डालकर मार डालने का भी दोषी ठहराया गया था. उसकी एक अन्य पत्नी ने उसके ख़िलाफ़ गवाही दी और अदालत को बताया था कि कैसे अब्दुल्ला शाह ने उसके शरीर पर पेट्रोल छिड़कर उसे जलाने की कोशिश की थी. अधिकारियों का यह भी कहना है कि अब्दुल्ला शाह ने अपनी छोटी बिटिया को भी मार डाला था. राष्ट्रपति करज़ई के प्रवक्ता ने बताया, "राष्ट्रपति ने मौत की सज़ा को इसलिए स्वीकृति दी क्योंकि उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने की ज़रूरत समझी." |
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