|
अफ़ग़ानिस्तान के लिए सहायता बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान को पुनर्निर्माण के लिए अगले तीन साल में क़रीब आठ अरब डॉलर सहायता देने का वादा किया गया है. जर्मनी के बर्लिन शहर में 50 देशों की बैठक में यह फ़ैसला किया गया है. अफ़ग़ानिस्तान के वित्त मंत्री अशरफ़ ग़नी ने बैठक के पहले दिन कहा कि बर्लिन बैठक में भाग लेने वाले देशों ने वादा किया है कि अफ़ग़ानिस्तान को अगले तीन साल के दौरान आठ अरब बीस करोड़ डॉलर दिए जाएंगे. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इन देशों से अपील की थी कि वे देश के लिए सहायता राशि में बढ़ोत्तरी करें अन्यथा पुनर्निर्माण का काम अधूरा ही रह जाएगा. अफ़ग़ानिस्तान अपने छह पड़ोसी देशों के साथ इस बात पर भी राज़ी हुआ है कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर सहयोग किया जाएगा. हामिद करज़ई ने बर्लिन सम्मेलन में प्रतिनिधियों से कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी से अफ़ग़ानिस्तान की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान के वित्त मंत्री अशरफ़ ग़नी कहा कि इस सहायता राशि पर वह बहुत ख़ुश हैं क्योंकि यह टोक्यो में 2002 में हुए सम्मेलन में घोषित की गई राशि से काफ़ी ज़्यादा है. अफ़ग़ानिस्तान के वित्त मंत्री अशरफ़ ग़नी ने यह भी बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में सहयोग के लिए चीन, पाकिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के साथ समझौता किया गया है. बेहतर भविष्य बर्लिन सम्मेलन के बाद अफ़ग़ानिस्तान को सबसे ज़्यादा धन देने वाला देश है अमरीका जिसने अगले दो साल में दो अरब और बीस करोड़ डॉलर देने का वादा किया है.
ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान के लिए अपनी सहायता दोगुनी कर दी है और उसने बढ़ाकर 50 करोड़ पाउंड यानी क़रीब 90 करोड़ डॉलर कर दी है. अशरफ़ ग़नी ने संवाददाताओं को बताया, "अंतरराष्ट्रीय सहायता से अब हमारे देश के लोगों का यह सपना पूरा होता नज़र आ रहा है कि वे भी एक अच्छे भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं." उन्होंने बताया कि चार अरब 40 करोड़ डॉलर सिर्फ़ इस साल के लिए दिए जाने का वादा किया गया है और यह उतनी ही राशि है जितनी माँगी गई थी." बर्लिन में बीबीसी संवाददाता रे फरलोंग का कहना है कि यह सहायता अभी उस राशि से कम है जिसकी उम्मीद की गई थी. अफ़ग़ान सरकार का कहना है कि देश के पुनर्निर्माण के लिए अगले सात साल में क़रीब साढ़े 27 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||