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अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव सितंबर तक टले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन की समाप्ति के बाद होने वाला पहला चुनाव सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है. वर्ष 2001 के आख़िर में तय समयसारिणी के अनुसार यहाँ जून में चुनाव होने थे. राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने चुनाव में देरी की घोषणा करते हुए बताया कि अब संसदीय और राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव एक साथ होंगे. चेतावनी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि सुरक्षा कारणों और साजो-सामान की कमी के कारण जून में चुनाव संभव नहीं.
राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि चुनाव में देरी के कारण संयुक्त राष्ट्र संसदीय और राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव साथ-साथ करा पाएगा. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि चुनाव में देरी का एक कारण मतदाता सूची पूरी तरह तैयार न होना भी है. अभी तक सिर्फ़ 15 प्रतिशत मतदाताओं का ही पंजीकरण हो पाया है. अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब एक करोड़ पाँच लाख मतदाता है लेकिन इनमें से सिर्फ़ 15 लाख का नाम ही मतदाता सूची में आ पाया है. मतदाता सूची तैयार करने में जुटी संयुक्त राष्ट्र की टीम ने जनवरी में ही कहा था कि सुरक्षा कारणों से देश के कई हिस्सों में वे जा नहीं पा रहे. देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्से को सुरक्षा की दृष्टि से ज़्यादा संवेदनशील माना जा रहा है. |
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