| पाकिस्तानी क़बायली नेताओं को क्षमादान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में एक वरिष्ठ सैनिक कमांडर ने उन क़बायली सरदारों के लिए क्षमादान की घोषणा कर दी है जिन पर अल क़ायदा और तालेबान के संदिग्ध लड़ाकों को शरण देने के आरोप लगे हैं. पुलिस इनकी ज़ोर-शोर से तलाश कर रही थी और इन पर कुछ विदेशी चरमपंथियों को भी शरण देने के आरोप हैं. क्षमादान की घोषणा क़बायलियों की बैठक जिरगा में की गई है, जिसके दौरान इन छिपे हुए क़बायली सरदारों ने आ कर अच्छे आचरण की प्रतिज्ञा की और इस बात के लिए वादा किया कि वे इस इलाक़े में मौजूद सभी विदेशियों के नाम दर्ज करवा देंगे. स्थानीय क़बायली परंपराओं के तहत हुए इस समझौते से पहले इस इलाक़े में तालेबान-समर्थक क़बायली सरदारों और सुरक्षा बलों के बीच ज़बर्दस्त भिड़ंत हुई थीं, जिनमें बड़ी संख्या में सैनिकों सहित, सौ से भी अधिक लोग मारे गए थे. इस इलाक़े में की गई सुरक्षा बलों की कार्रवाई से पहले ऐसी रिपोर्टें थीं कि ओसामा बिन लादेन के सहयोगी एमन अल-ज़वाहिरी सुरक्षा बलों के हाथों पकड़े जाने के कगार पर थे लेकिन असल में इस इलाक़े में अल-क़ायदा का कोई भी वरिष्ठ नेता गिरफ़्तार नहीं किया गया है. अल-ज़वाहिरी को अल-क़ायदा में नंबर दो का नेता माना जाता है. सीमा के दूसरी तरफ़ अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी बल संदिग्ध तालेबान समर्थकों के ख़िलाफ़ धर-पकड़ की कार्रवाई कर रहे हैं. बैठक में मुलाक़ात दक्षिणी वज़ीरिस्तान में क़बायली सरदारों की जिरगा में सैनिक कमांडर जनरल सफ़दर हुसैन ने उन पाँच क़बायलियों से हाथ मिलाया जिन्हें हाल तक अपराधी क़रार दिया जा रहा था. इनकी पाकिस्तानी पुलिस को तलाश थी. इन क़बायलियों पर इस इलाक़े में शरण-प्राप्त संदिग्ध विदेशी इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ की गई सैनिक कार्रवाई के प्रतिरोध की अगुवाई करने के आरोप लगे थे. स्थानीय प्रथा के मुताबिक़ क़बायली सरदारों ने इस तनातनी के ख़त्म होने के उपलक्ष्य में, सैनिक कमांडर को कुछ तोहफ़े भेंट किये. लेफ़्टीनेंट जनरल हुसैन ने इन सभी क़बायलियों के लिए आम माफ़ी का ऐलान किया और वहाँ मौजूद क़बायली नेताओं से कहा कि वे आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में समर्थन दें. |
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