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बुधवार, 04 अगस्त, 2004 को 15:56 GMT तक के समाचार
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राष्ट्रपति के फ़ैसले का स्वागत

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मामला राष्ट्रपति के पास भेजा था
कोलकाता के लोगों ने धनंजय चटर्जी की अपील को ठुकराने के राष्ट्रपति के फ़ैसले का आम तौर पर स्वागत किया है, लेकिन कई मानवाधिकार संगठनों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया है.

कोलकाता से बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि जिन परिवारों में कम उम्र की लड़कियाँ हैं उन्होंने ख़ास तौर पर इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

तमाल और शुभ्रा मुखर्जी की दो स्कूल जाने वाली बेटियाँ हैं और उनका कहना है कि राष्ट्रपति का फ़ैसला सराहनीय और स्वागतयोग्य है.

उनका मानना है कि धनंजय को काफ़ी पहले फाँसी दे दी जानी चाहिए थी, उनकी पत्नी भी उनसे सहमत हैं और उनका कहना है कि दूसरे अपराधियों को गुनाह करने से रोकने के लिए मृत्युदंड दिया जाना ज़रूरी है.

 मृत्युदंड में कोई ख़राबी नहीं है, अगर फाँसी के तरीक़े पर लोगों को एतराज़ हो तो गोली मारने जैसे दूसरे तरीक़े अपनाए जा सकते हैं
घरेलू महिला जान्हवी बिस्वास

कोलकाता की एक घरेलू महिला जान्हवी बिस्वास का कहना है कि "मृत्युदंड में कोई ख़राबी नहीं है, अगर फाँसी के तरीक़े पर लोगों को एतराज़ हो तो गोली मारने जैसे दूसरे तरीक़े अपनाए जा सकते हैं."

जिन लोगों ने बीबीसी से बात की उनमें से ज़्यादातर का मानना था कि महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

पश्चिम बंगाल को कुछ वर्ष पहले तक महिलाओं के लिए काफ़ी सुरक्षित माना जाता था लेकिन देश के दूसरे हिस्सों की तरह यहाँ भी बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा कि अपराधियों में डर पैदा करने के लिए धनंजय जैसे जघन्य अपराधी को फाँसी की सज़ा दिया जाना सही है.

विरोध

मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त करने के हामी कई लोग राष्ट्रपति के इस निर्णय से नाख़ुश भी हैं.

 हमारा संगठन अपराधियों को दंड देने के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन मृत्युदंड के ख़िलाफ़ है, ख़ास तौर पर फाँसी के
सुजाता भद्रो

जानी-मानी फ़िल्म अभिनेत्री और महिला पत्रिका की संपादक अपर्णा सेन का मानना है कि धनंजय को मृत्युदंड देने से कुछ हासिल नहीं होगा, मृत्युदंड किसी भी देश में अपराध रोकने में कारगर नहीं रहा है.

अपर्णा सेन के इस विचार का समर्थन कोलकाता स्थित मानवाधिकार संगठन एपीडीआर ने भी किया है.

इस संगठन के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के फ़ैसले के विरोध में कोलकाता में प्रदर्शन किया और नारे लगाए.

एपीडीआर के महासचिव सुजातो भद्रा का कहना है कि "हमारा संगठन अपराधियों को दंड देने के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन मृत्युदंड के ख़िलाफ़ है, ख़ास तौर पर फाँसी के."

राष्ट्रपति के ताज़ा निर्णय के बाद लग रहा है कि बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी पाए गए धनंजय चटर्जी को फाँसी दिया जाना लगभग तय हो गया है.

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