BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 25 जून, 2004 को 11:55 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
पुश्तैनी पेशा है फांसी चढ़ाना

नाटा मलिक
नाटा मलिक ने अभी तक 24 लोगों को फांसी के फंदे पर चढ़ाया है
कोलकाता के नाटा मल्लिक के लिए फांसी देना एक पुश्तैनी पेशा है.

ब्रिटिश राज में उनके पिता ने 500 से भी अधिक लोगों को फांसी पर लटकाया था जिनमें अधिकतर बंगाली क्रांतिकारी थे.

नाटा मल्लिक के दादा ने भी कईयों के गले में फंदा बाँधा था.

अब नाटा मल्लिक अपनी नौकरी के अंतिम दौर में हैं मगर लगता है कि इससे पहले उन्हें एक और क़ैदी को फांसी पर चढ़ाना होगा.

फिर इस पुश्तैनी पेशे का दायित्व उनके पोते के कंधों पर चला जाएगा.

आख़िरी फांसी

कोलकाता के अलीपुर जेल में धनंजय चटर्जी को फांसी देने की ज़िम्मेदारी नाटा मल्लिक को दी गई है.

 क्या वे ऐसे किसी व्यक्ति को माफ़ कर देंगे जिन्होंने उनकी अपनी बेटी के साथ बलात्कार किया हो? दूसरे को उपदेश देना बहुत आसान है

धनंजय को शुक्रवार को ही सज़ा दी जानी थी मगर फिर ये सज़ा टल गई क्योंकि ये मामला अभी राष्ट्रपति के पास विचार के लिए गया हुआ है.

चटर्जी को 1990 में 14 वर्ष की एक लड़की के साथ बलात्कार और हत्या का दोषी पाए जाने के बाद मौत की सज़ा सुनाई गई.

नाटा कहते हैं,"वह तो एक दैत्य है. उसे फांसी नही बल्कि शेरों के सामने फेंक देना चाहिए".

मल्लिक फांसी की सज़ा का पुरज़ोर समर्थन करते हैं और अब तक 24 लोगों को फांसी दे चुके हैं.

हर फांसी के लिए उन्हें पाँच हज़ार रूपए मिले.

धनंजय चटर्जी को फ़ांसी की सज़ा का विरोध करने के लिए मानवाधिकार संगठनों ने पिछले कई दिनों से आंदोलन किया.

मगर नाटा मल्लिक इस विरोध को सही नहीं मानते हैं और सवाल करते हैं,"क्या वे ऐसे किसी व्यक्ति को माफ़ कर देंगे जिन्होंने उनकी अपनी बेटी के साथ बलात्कार किया हो? दूसरे को उपदेश देना बहुत आसान है".

परंपरा जारी रहेगी

अंतिम ज़िम्मेदारी निभाने में नाटा मल्लिक का साथ देंगे उनके बेरोज़गार बेटे प्रभात मल्लिक.

 मैंने किसी क्रांतिकारी या स्वतंत्रता सेनानी को नहीं लटकाया, मैंने केवल अपराधियों को सज़ा दी है

नाटा कहते हैं,"मैं केवल हैंडल घुमाऊँगा मगर ये मैं आख़िरी बार करूँगा".

पिछले एक सप्ताह से दादा और पोता मिलकर पुतले के साथ अभ्यास कर रहे हैं.

उनके पिता शिवलाल मल्लिक ने भारत के कई जाने-माने स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी पर लटकाया था जिनमें सूर्य सेन का भी नाम शामिल है.

सूर्य सेन ने अपने साथियों के साथ 1930 में चटगांव बंदरगाह को दो दिनों के लिए अंग्रेज़ों के क़ब्ज़े से छीन लिया था.

ये पूछे जाने पर कि क्या नाटा मल्लिक को उन लोगों को याद करके डर लगता है जिन्हें उन्होंने फांसी पर लटकाया था, वे कहते हैं,"हाँ".

नाटा मल्लिक
मल्लिक कहते हैं कि उन्हें कई बार उन लोगों के चेहरे याद आते हैं जिन्हें उन्होंने फांसी दी है

नाटा बताते हैं,"कभी-कभी ऐसा होता है. मैंने मासूम चेहरे वाले कुछ अपराधियों को फांसी पर लटकाया है और कभी-कभी वे मुझे सपने में नज़र आते हैं".

नाटा मल्लिक को ये सवाल अच्छा नहीं लगता कि वे मौत की सज़ा का समर्थन क्यों करते हैं.

वे कहते हैं,"पिछले 15 वर्षों में मैं पहली बार किसी को मौत की सज़ा दे रहा हूँ मगर मेरी अंतरात्मा साफ़ है. मैंने किसी क्रांतिकारी या स्वतंत्रता सेनानी को नहीं लटकाया, मैंने केवल अपराधियों को सज़ा दी है".

"मैं पुलिस की तरह हूँ. वे अपराधियों को पकड़ते हैं. मैं उनमें से सबसे बुरे लोगों को फांसी देता हूँ. मैं वह कर रहा हूँ जो सरकार मुझसे चाहती है. फ़ैसला तो सरकार को करना है कि अपराधियों को लटकाया जाना चाहिए कि नहीं".

जानी-मानी हस्ती

वैसे हाल के दिनों में भारत में अदालतें मौत की सज़ा सुनाने से बचती रही हैं.

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में उनके दो सिख अंगरक्षकों को मौत की सज़ा दी गई थी.

उन्हें 1989 में फांसी दी गई.

नाटा के घर पर पिछले कई दिनों से पत्रकारों की भीड़ उमड़ी हुई है मगर वे इससे परेशान हैं.

मगर उनके परिवारवाले इससे बेहद खुश हैं और वे ख़ुद को नामी-गिरामी हस्ती जैसा महसूस कर रहे हैं.

नाटा के बेटे महादेव फ़ख़्र से कहते हैं,"आपको पता है उन्होंने बंगाली फ़िल्मों में अभिनय भी किया है".

मगर शायद उन्हें पता नहीं कि हाल के कुछ दिनों में नाटा मलिक फ़िल्मी सितारों से भी अधिक मशहूर हो गए हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>