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सज़ा माफ़ी का फ़ैसला राष्ट्रपति पर निर्भर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बलात्कार और हत्या के एक मामले में कोलकाता के एक युवक को मौत की सज़ा सुनाई गई है और अब इस बारे में राष्ट्रपति के अंतिम फ़ैसले की प्रतीक्षा की जा रही है. पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को कोलकाता के अलीपुर जेल में शुक्रवार को फांसी दी जानी थी. मगर गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा को दो दिन के लिए टाल दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया और अंतिम फ़ैसला राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर छोड़ दिया. अदालत ने कहा कि धनंजय की माफ़ी की अर्जी राष्ट्रपति के पास है इसलिए वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकती. राष्ट्रपति के पास सज़ा को माफ़ करने का अधिकार है और फ़िलहाल वे इस बारे में समीक्षा कर रहे हैं. राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि राष्ट्रपति इस संबंध में गृह मंत्रालय से सलाह ले रहे हैं और उसके विचार जानने के बाद ही वे कोई फ़ैसला करेंगे. धनंजय चटर्जी ने 1990 में कोलकाता में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी. 1991 में एक सत्र न्यायालय ने धनंजय को मौत की सज़ा सुनाई. बाद में उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी फ़ैसले को बरकरार रखा. इस महीने राष्ट्रपति और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल वीरेन शाह ने भी धनंजय की माफ़ी की अर्जी ठुकरा दी थी. मगर मौत की सज़ा का विरोध करने वाले कई मानवाधिकार संगठन धनंजय को सुनाई गई सज़ा का विरोध कर रहे हैं. |
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