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रविवार, 09 अक्तूबर, 2005 को 12:23 GMT तक के समाचार
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लोगों को अभी भी सहायता का इंतज़ार

सोनिया गाँधी, प्रणव मुखर्जी और ग़ुलाम नबी आज़ाद
सोनिया गाँधी सुरक्षा की वजह से किसी से मिल नहीं सकीं
भारतीय कश्मीर के उड़ी इलाक़े को भूकंप से सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है और चौबीस घंटों से अधिक समय बीत जाने के बाद अभी भी लोगों को न खाने-पीने को कुछ है और न सर छिपाने की जगह है.

उड़ी में लोगों से बात करते हुए ऐसे बहुत से लोग मिले जिन्होंने शनिवार की पूरी रात बारिश और ठंड के बावजूद खुले में बिताई.

बच्चों को भी अब तक खाने को कुछ नहीं मिला है.

जब मैं उड़ी मुख्यशहर पहुँचा तो देखा कि वहाँ कोई ख़ास नुक़सान नहीं हुआ है. वहाँ बाज़ार में आग लगी थी जिससे कुछ दुकानों को नुक़सान पहुँचा है.

इसके बाद आगे बढ़े ही थे कि लगामा गाँव के पास कुछ लोगों ने हमें रोका. ये कश्मीरी पंडितों का गाँव है. उन्होंने हमसे कहा कि उनकी पूछ परख कोई कर ही नहीं रहा है.

उनका कहना था कि उनके मकान नष्ट हो गए हैं और सर छिपाने तक की जगह नहीं बची है.

इसके बाद हम गए कमलगई गाँव में. पहाड़ों पर बसा यह गाँव लगभग पूरी तरह नष्ट हो गया है. ढाई-तीन सौ मकानों वाले इस गाँव में सात लोगों की मौत हुई है.

यहाँ लोगों ने बताया कि उन्होंने बारिश और ठंड के बावजूद रात खुले में बिताई है. यहाँ हमारी बात कुछ बच्चों से भी हुई जिन्होंने बताया कि भूकंप आने के बाद से उन्हें खाने को कुछ नहीं मिला है.

अलबत्ता एक व्यापारी ने किसी स्वयंसेवी संगठन की सहायता से वहाँ बोतल बंद पानी पहुँचाया है.

लगभग यही हाल सुल्तानदकी में था.

इसके बाद हम पहुँचे कमलकोट. यहाँ हमने देखा कि घायलों को लोग चारपाइयों पर डालकर पहाड़ों से नीचे ला रहे थे जिससे कि उन्हें इलाज़ मुहैया करवाया जा सके.

ज़रूरत

हमारी मुलाक़ात स्थानीय विधायक और राज्य सरकार में मंत्री ताज मोइनुद्दीन से भी बात हुई.

उन्होंने माना कि लोगों तक सहायता नहीं पहुँच सकी है और शनिवार की रात लोगों को खुले में बितानी पड़ी है.

उन्होंने कहा कि सहायता धीरे-धीरे पहुँचेगी. उनका कहना था कि अभी तीस हज़ार से ज़्यादा टेंटों की ज़रुरत है ताकि लोगों को आश्रय दिया जा सके लेकिन एक हज़ार टेंट की उपलब्ध हैं.

उड़ी की बस्ती में अब तक कोई चार सौ टेंट पहुँच सके हैं.

उनका कहना था कि भूकंप से हताहत लोगों के बारे में जो अनुमान लगाए जा रहे हैं संख्या उनके कहीं ज़्यादा हो सकती है.

उन्होंने हमसे कहा कि हर जगह तुरंत पहुँचना संभव नहीं है.

सेना और सोनिया

उड़ी में हमने देखा कि सेना के हैलिकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं.

हमने हालांकि ज़मीन पर कोई राहत कार्य नहीं देखा लेकिन लोगों ने बताया कि घायलों को बचाने और उन्हें निकालकर इलाज के लिए ले जाने में सेना की सहायता उल्लेखनीय रही है.

सोनिया गाँधी अस्पताल में
सोनिया गाँधी अस्पताल में जाकर घायलों से मिलीं

सेना ने आगे बढ़कर उनकी सहायता की है.

लेकिन लोग प्रशासन की भूमिका से बेहद नाराज़ थे और उनका कहना था कि समय पर सहायता पहुँचाने में प्रशासन विफल रहा है.

सोनिया गाँधी को भी हमने उड़ी में देखा. उन्होंने एक भाषण दिया और लोगों को आश्वासन दिया कि लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी.

लेकिन जिन लोगों का हालचाल जानने सोनिया गाँधी वहाँ पहुँची थीं वे लोग तो उनसे मिल भी नहीं पाए क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें रोक दिया.

उन्होंने तो हमें भी रोक दिया गया. पता नहीं लोगों से उनकी बात कहीं हो भी सकी या नहीं.

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