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कुछ इलाक़ों से संपर्क अब भी नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने भूकंप से हुई तबाही के बाद राहत का कार्य रविवार सुबह फिर शुरू कर दिया और ऐसे इलाकों की सड़कों को ठीक करने में जुट गई है जहाँ से संपर्क पूरी तरह टूट गया था. सेना ने कहा है कि कुछ ऐसे इलाक़े हैं जहाँ से कोई संपर्क स्थापित नहीं हो रहा है और वहाँ नागरिकों के अलावा सेना के कई जवान भी फँसे हो सकते हैं. सेना के प्रवक्ता कर्नल हेमंत जुनेजा ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि सेना के ऑपरेशन इमदाद के तहत जवान पूरी तरह जुटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि कश्मीर के उड़ी क्षेत्र में कम से कम छह टेलीफ़ोन लाइनें लगाई गई हैं जिससे कि बाक़ी दुनिया से उसका संपर्क क़ायम हो सके. लोगों को इन लाइनों पर मुफ़्त एसटीडी सेवा भी मुहैया कराई गई है. उन्होंने बताया कि रविवार सुबह से सेना के बुलडोज़र एक बार फिर काम में जुट गए हैं और गाँवों और दूरस्थ इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों की मरम्मत कर रहे हैं. कर्नल जुनेजा ने बताया कि सेना ने मोबाइल टेक्नीकल टीम को भी संपर्क स्थापित करवाने के काम में लगाया है. सहायता सेना की ओर से जम्मू कश्मीर के भूकंप पीड़ित इलाकों में अब तक 100 टन खाद्य सामग्री भेजी गई है.
इसके अलावा बेघर-बार हुए लोगों के लिए एक हज़ार टेंट भेजे गए हैं और उनके लिए पीने के पानी का इंतज़ाम किया गया है. कर्नल जुनेजा ने माना कि अभी भी कुछ इलाक़े हैं जहाँ संपर्क क़ायम नहीं हो सका है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेना के कुछ जवान अभी भी फँसे हुए हैं हालाँकि यह बताना संभव नहीं है कि कितने जवान फँसे हुए हैं. उन्होंने बताया कि अब तक सेना के 38 जवानों की मौत हो चुकी है और 50 घायल हैं. सरकारी आँकड़ों के हिसाब से भारतीय कश्मीर में अब तक 302 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 782 घायल हुए हैं. कोई ढाई हज़ार मकान शनिवार को आए भूकंप में तबाह हुए हैं. |
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