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फ़िल्मों में धूम्रपान पर प्रतिबंध को चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़िल्मों और टीवी में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फ़ैसले को चुनौती देनवाली याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है. इस फ़ैसले को चुनौती देनेवाले फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट का दावा है कि सरकार के इस क़दम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता है. अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब माँगा है और सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी है. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि सिगरेट पर प्रतिबंध युवाओं को इसकी लत से बचाने के लिए लगाया गया है और इसको स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों का समर्थन हासिल है. यह प्रतिबंध 2 अक्टूबर से लागू होना था लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि इसे जनवरी तक स्थगित कर दिया गया है. ऐसा अनुमान है कि भारत में आठ लाख लोग धूम्रपान से उत्पन्न बीमारियों की वजह से मरते हैं. प्रतिबंध की घोषणा केंद्र सरकार ने मई में प्रतिबंध की घोषणा की थी और कहा था कि किसी भी नई फ़िल्म और टीवी कार्यक्रम में सिगरेट के दृश्य नहीं होंगे. इस पर फ़िल्म निर्माताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी. महेश भट्ट का कहना है,'' सिगरेट के दबे-छुपे विज्ञापनों पर प्रतिबंध की बात समझ में आती है लेकिन धूम्रपान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है.'' लेकिन स्वास्थ्य मंत्री ए रामदॉस का कहना है कि तंबाकू का सेवन करनेवाले युवा और महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. उनका दावा है कि उनको विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे लोगों का समर्थन हासिल है. ख़बरें हैं कि इसको लेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय में भी मतभेद हैं. प्रसारण मंत्रालय इस मामले में थोड़ी ढील देना चाहता है लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय कोई ढील देने के पक्ष में नहीं है. माना जा रहा है कि इस कारण यह फ़ैसला 2 अक्टूबर से टल सकता है. नए नियमों के तहत जिन पुरानी फ़िल्मों में ऐसे दृश्य होंगे उनके नीचे यह लिखना होगा कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. साथ ही सिगरेट निर्माताओं को सिगरेट के पैकेट पर निकोटिन की मात्रा भी लिखनी होगी. |
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