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क़ैदी की पिटाई पर सैनिक को सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में एक अमरीकी जाँचकर्ता सार्जेंट जोशुआ क्लाउस को जेल में एक अफ़ग़ान क़ैदी की पिटाई करने के आरोप में पाँच महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई है. उस क़ैदी की बाद में मौत हो गई थी. काबुल के पास बगराम में अमरीकी सैनिक अड्डे में 2002 में दो क़ैदियों की मौत हो गई थी जिसके बाद से पाँच सैनिकों को दोषी पाया जा चुका है और सार्जेंट जोशुआ क्लाउस छठे ऐसे सैनिक हैं जिन्हें दोषी पाया गया है. अफ़ग़ान सरकार ने इससे पहले दोषी पाए गए सैनिकों को सज़ा देने के मामले में ढिलाई पर निराषा जताई है. दोषी पाए गए सैनिकों को दो महीने की जेल की सज़ा से लेकर उनकी रैंक को कम करने तक का दंड शामिल रहा है. दोषी सार्जेंट क्लाउस को क़ैदी के साथ दुर्व्यवहार करने और उसकी पिटाई करने का दोषी पाया गया. साथ ही सार्जेंट क्लाउस पर यह भी आरोप है कि उसने क़ैदी को अपने जूतों चूमने पर मजबूर किया था. मुस्लिम समुदाय में किसी के जूते चूमने को बहुत बड़ा अपमान समझा जाता है. सैन्य ख़ुफ़िया सैनिस ने कहा कि क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार के ये मामले पूछताछ के दौरान हताशा और निराशा की वजह से हुए थे. सार्जेंट क्लाउस ने क़ैदियों के साथ दुर्व्यहार के आरोप स्वीकार किए. इनमें एक क़ैदी 22 वर्षीय दिलावर था जो टैक्सी चालक था. दिलावर और एक अन्य क़ैदी हबीबुल्लाह दोनों की बाद में मौत हो गई थी. उनकी मौत के आरोप में किसी को कोई सज़ा नहीं हुई है. |
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