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'तालेबान का हमले का दावा झूठा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ान अधिकारी उस आत्मघाती बम हमलावर की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जिसने काबुल के पास सैनिक छावनी पर हमला करके 12 लोगों की जान ले ली. तालेबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है और आत्मघाती हमलावर का नाम भी बताया है लेकिन अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि तालेबान का दावा झूठा है. जून महीने के बाद यह अब तक का सबसे घातक हमला था, जून में कंधार में एक मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 20 लोग मारे गए थे. बुधवार को व्यस्त बस अड्डे पर हुए इस धमाके के एक प्रत्यक्षदर्शी व्यक्ति का कहना है कि सैनिक वर्दी पहने एक व्यक्ति ने अपनी मोटरसाइकिल एक बस से टकरा दी. अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ज़हीर आज़िमी का कहना है कि नैटो के अधिकारी इस जाँच में मदद कर रहे हैं. ख़ुद को तालेबान का प्रवक्ता बताने वाले अब्दुल लतीफ़ हक़ीमी नाम के व्यक्ति ने बीबीसी के संवाददाता रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई को बताया कि आत्मघाती हमलावर तालेबान का सदस्य था जिसका नाम मुल्ला सरदार मोहम्मद था. तालेबान के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि आम अफ़ग़ान नागरिकों को क्यों निशाना बनाया गया तो हक़ीमी का कहना था कि दरअसल विदेशियों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी. रक्षा मंत्री जनरल रहीम वरदक ने तालेबान के इस दावे को झूठा बताया है और कहा है कि "यह हमला शांति और स्थिरता के किसी और दुश्मन का काम है." उन्होंने कहा, "तालेबान झूठे दावे करता रहता है, आप जाँच पूरी होने तक इंतज़ार कीजिए, अधिकारी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर कौन था." अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी नागरिको, राहतकर्मियों और संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, विदेशियों के अपहरण की घटनाएँ भी होती रहती हैं. |
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