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'मदरसों के रजिस्ट्रेशन का विवाद सुलझा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सरकार ने कहा है कि मदरसों के रजिस्ट्रेशन का विवाद सुलझा लिया गया है. मदरसों के पाँच संगठनों के समूह आईटीएमडी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने शुक्रवार को कहा कि मदरसों के रजिस्ट्रेशन संबंधी बाधाएँ समाप्त हो गई हैं. समझौते के बारे में ज़्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन धार्मिक मामलों के मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार मदरसों को अब केवल अपना सालाना हिसाब-किताब ही प्रशासन को देना होगा. एक सरकारी बयान में कहा गया हैकि दोनों पक्ष 31 दिसंबर की समय-सीमा तक क़रीब 13 हज़ार मदरसों का रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा. बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान अज़ीज़ ने मदरसों के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि रजिस्ट्रेशन के पीछे सरकार का कोई गुप्त एजेंडा नहीं है. कोई बाहरी दबाव नहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू किए जाने के पीछे किसी बाहरी दबाव की बात से इनक़ार किया. हालाँकि अज़ीज़ ने कहा कि उनकी सरकार धार्मिक वैमनस्य पैदा करने वाली शिक्षा व्यवस्था को हतोत्साहित करना चाहती है. उन्होंने कहा कि इस तरह की नकारात्मक शिक्षा इस्लाम की भावनाओं के ख़िलाफ़ है. मदरसों के शीर्ष संगठन आईटीएमडी के प्रवक्ता मुफ़्ती मुनीब-उर-रहमान ने कहा कि उनके संगठन से जुड़ा कोई भी मदरसा हिंसा या चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ा नहीं है, इसलिए उन्हें रजिस्ट्रेशन कराने में कोई समस्या नहीं है. रहमान ने सरकार के साथ विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर ख़ुशी व्यक्त की. |
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