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अधिकार चाहती हैं भारतीय यौनकर्मी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विभिन्न हिस्सों में देह व्यापार कर जीविका चलानेवाली महिला यौनकर्मी अपने पेशे को क़ानूनी अधिकार दिलवाने के लिए अभियान तेज़ करेंगी. देश भर से आई महिला यौनकर्मियों ने कोलकाता मे एक अधिवेशन में अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फ़ैसला किया. उनका कहना था कि महाराष्ट्र में डांस बारों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उनके लिए ये क़दम उठाना आवश्यक हो गया है. अधिवेशन में आए प्रतिनिधियों ने कहा कि यौनकर्मियों के बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके पेशे को क़ानूनी मान्यता दिलवाना आवश्यक है. यौनकर्मियों के संगठन नेशनल नेटवर्क ऑफ़ सेक्स वर्कर्स ने कहा है कि वह दिल्ली में संसद के बाहर एक विरोध रैली का आयोजन करेगी. कोलकाता की संस्था दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव स्वप्ना गाइन कहती हैं,"आप देखिए कि कैसे महाराष्ट्र में हज़ारों महिलाएँ बेरोज़गार हो गईं. अगर ये पेशा क़ानूनी होता तो ऐसी समस्या कभी नहीं आती". कोलकाता में हुए अधिवेशन में बांग्लादेश से भी यौनकर्मियों के प्रतिनिधि आए. उन्होंने भी भारतीय यौनकर्मियों की माँग का समर्थन किया. |
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