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केजीबी अधिकारी के आरोपों का खंडन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी ने उन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है जिनमें कहा गया है कि शीत-युद्ध के दौरान पूर्व सोवियत संघ ने इंदिरा गांधी सरकार में वरिष्ठ लोगों को रिश्वत दी थी. ये आरोप पूर्व सोवियत संघ की गुप्तचर सेवा केजीबी के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के रख-रखाव के लिए ज़िम्मेदार पूर्व अधिकारी वेसिली मिट्रोखिन की ताज़ा किताब में लगाए गए हैं. कांग्रेस की महासचिव अंबिका सोनी ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि ऐसे बेबुनियाद आरोपों पर तो उनकी पार्टी से प्रतिक्रिया की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए. उनका कहना था कि ये आरोप बिना किसी सबूत के हैं और यही दर्शाते हैं कि लेखक को भारत के बारे में ज़रा भी जानकारी नहीं है. अंबिका सोना का कहना था कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर, कोई भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है. 'सीपीआई ने उपन्यास कहा' कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की केंद्र में सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) पर इसी तरह रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं. पार्टी का कहना है कि ये किताब जानबूझकर चरित्र हनन करने की कोशिश है. पार्टी प्रवक्ता अतुल कमार अंजान ने कहा कि ये किताब तो एक उपन्यास है और उसमें किए गए दावे हास्यास्पद हैं. उनका कहना था कि किताब का इस समय प्रकाशित होने का मतलब है कि भारत की छवि को बिगाड़ा जाए क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावेदार है. |
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