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असम में बंद से जनजीवन प्रभावित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट असम (उल्फ़ा) के बंद के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. असम में दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान और स्कूल बंद रहे और सड़कों पर कुछेक वाहन ही चल रहे थे. उल्फ़ा ने अपने संस्थापक रॉबिन हांदिक की मौत की विरोध में बंद का आह्वान किया था. 68 वर्षीय हांदिक की तेज़पुर जेल में मौत हो गई थी. दिसंबर 2003 में भूटान में गिरफ़्तारी के बाद उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया था. उल्फ़ा का आरोप है कि हांदिक को ज़हर देकर मारा गया. हालांकि असम सरकार इससे इनकार करती है. इसके पहले बुधवार को उल्फ़ा ने घोषणा की थी कि वह भारत सरकार के साथ बातचीत को तैयार है. बातचीत उल्फ़ा ने कहा था कि उसने भारत सरकार के सामने बातचीत के लिए एक ठोस प्रस्ताव रखा है. असम की प्रमुख लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने बीबीसी को बताया कि भारत सरकार ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और अक्टूबर के पहले सप्ताह में बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है. ग़ौरतलब है कि उल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच वरिष्ठ असमी लेखिका इंदिरा गोस्वामी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहीं हैं. उनका कहना था कि उल्फ़ा केंद्र सरकार से बातचीत के लिए आठ सदस्यीय दल भेजेगा. इसमें लेखक, संपादक और अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल होंगे. उल्फ़ा ने दिसंबर में शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया था. केंद्र सरकार ने उल्फ़ा से कहा था कि बातचीत से पहले उन्हें हिंसा छोड़नी होगी. असम के अलगाववादी पिछले 25 वर्षो से अपना अभियान चला रहे हैं और इसमें 10 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. |
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