|
असम में कई धमाके, पाइपलाइनों को क्षति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में विस्फोटों का सिलसिला थमा नहीं है. गुरुवार को वहां कुछ और विस्फोट हुए हैं. हालांकि किसी के हताहत होने की कोई ख़बर है पर ऐसी सूचनाएँ हैं कि कई तेल लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं हैं. इन बम विस्फोटों की ज़िम्मेदारी अलगाववादी संगठन उल्फ़ा (यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम) ने ली है. पहले हुए विस्फोटों में एक पुलिसकर्मी मारा गया था और 17 अन्य घायल हो गए थे. उल्फ़ा के सैन्य इकाई के प्रमुख परेश बरुआ ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने यह क़दम इसलिए उठाया है क्योंकि केंद्र सरकार उनसे बातचीत में देरी कर रही है. केंद्र सरकार का कहना है कि वह विद्रोहियों से बातचीत करना चाहती है लेकिन उन्हें बातचीत से पूर्व की शर्तें स्वीकार नहीं हैं. उल्फ़ा बातचीत के लिए तब तक तैयार नहीं है जब तक कि केंद्र सरकार असम की स्वायत्तता स्वीकार करने को तैयार न हो जाए. खींचतान इसके पहले उल्फ़ा ने भारत सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया था. उल्फ़ा ने तब कहा था कि वह बातचीत के लिए हिंसा त्यागने की शर्त नहीं मान सकती. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विद्रोहियों के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा था. लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि भारत सरकार सिर्फ़ उन्हीं गुटों से बात करेगी जो हिंसा छोड़ेंगे. मनमोहन सिंह ने विद्रोहियों के समक्ष अपना प्रस्ताव असमिया भाषा की प्रख्यात लेखिका इंदिरा गोस्वामी को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से रखा था. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||