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अलगाववादियों ने केंद्र की पेशकश ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में असम राज्य के अलगाववादी विद्रोहियों ने केंद्रीय सरकार की शांति वार्ता की पेशकश को ठुकरा दिया है. मंगलवार को केंद्रीय सरकार ने कहा था कि वह किसी भी गुट के साथ बातचीत करने को तैयार है लेकिन वह पहले हिंसा का त्याग करे. अलगाववादी संगठन युनाइटिड लिब्रेशन फ़्रंट ऑफ़ असम 1979 से स्वतंत्रता की माँग कर रहा है. उस संगठन ने सरकार की पेशकश को विरोधाभास से भरा हुआ बताया है. उस संगठन का कहना था कि चाहे सरकार ने शर्त न रखने की बात की है लेकिन हिंसा का त्याग करने की बात से उसने शर्त तो लगाई ही है. हाल में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के किसी भी अलगाववादी संगठन से संप्रभुता के बारे में विचार-विमर्श करने से इनकार कर दिया था. अपने पूर्वोत्तर राज्यों के तीन दिवसीय दौरे के आख़िरी दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि अलगाववादी संगठनों के साथ किसी भी मुद्दे पर बातचीत हो सकती है लेकिन देश की संप्रभुता पर नहीं. उन्होंने असम में उस क़ानून को वापस लेने से भी इनकार कर दिया था जिसके तहत ग़ैर क़ानूनी रूप से राज्य में आने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होती है. |
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