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डीज़ल चोरी मामले में सैनिकों पर कार्रवाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने डीज़ल की चोरी के मामले में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है और कई सैनिकों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. भारतीय सेना के उत्तरी कमांड के प्रमुख ने कहा है कि जाँच के बाद पाया गया कि "कुछ सैनिक अपनी ड्यूटी में ढील बरत रहे थे." इस मामले की जाँच तब शुरू हुई थी जब सेना ने लद्दाख के लिए रवाना किए गए डीज़ल के सात टैंकरों में पानी भरा पाया था, कुछ जवानों और अधिकारियों पर तेल को रास्ते में बेच देने के आरोप लगे थे. सेना का कहना है कि जिन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है उनके नाम ज़ाहिर नहीं किए जाएँगे और जाँच अभी जारी रहेगी. भारतीय सेना के उत्तरी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरि प्रसाद ने कहा कि जाँच का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इस डीज़ल चोरी के मामले की पुलिस जाँच भी अलग से चल रही है. जम्मू कश्मीर और लद्दाख में सेना को काफ़ी मात्रा में डीज़ल की आवश्यकता होती है क्योंकि गाड़ियाँ चलाने के अलावा इसका इस्तेमाल बैरकों को गर्म रखने के लिए भी किया जाता है. जिन सात टैंकरों के डीज़ल की चोरी की जाँच चल रही है उनकी क्षमता नौ हज़ार लीटर की थी और उन्हें अंबाला, पठानकोट और जम्मू से लद्दाख के लिए भेजा गया था. इन टैंकरों में लाखों रूपए का डीज़ल भरा था लेकिन आरोप हैं कि मंज़िल पर पहुँचने से पहले ही रास्ते में सैनिकों ने इसे बेच दिया. सेना को किराए पर टैंकर देने वाले व्यवसायियों का कहना है कि इस घपले में ड्राइवर, अधिकारी और दलाल शामिल रहते हैं और यह धंधा कई वर्षों से चल रहा है जिससे सेना को लाखों रूपए का नुक़सान होता है. जम्मू कश्मीर पेट्रोल टैंकर मालिक संगठन के अध्यक्ष आनंद शर्मा का कहना है कि सेना को आपूर्ति किए जाने वाले डीज़ल में से लगभग 30 प्रतिशत चुरा लिया जाता है. आनंद शर्मा का कहना है कि यह चोरी गर्मियों के दिनों में बढ़ जाती है जब सेना सर्दी के दिनों के लिए बर्फ़ गिरने से पहले तक डीज़ल जमा करती है. |
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