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डीज़ल घोटाला सामने आया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में सेना को आपूर्ति किए जाने वाले डीज़ल की चोरी के एक घोटाले का पता चला है जो टैंकर मालिकों की मिलीभगत से की जाती थी. जानकारी के अनुसार इसमें सेना के अधिकारी भी शामिल हैं और यह घोटाला कई वर्षों से चला आ रहा था. पेट्रोल टैंकर एसोसिएशन का कहना है कि इस घोटाले में ड्राइवर, सेना के कुछ अधिकारी और दलाल शामिल हैं और इससे करोड़ों रुपए का नुक़सान उठाना पड़ा है. सेना ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वह इसकी जाँच कर रही है. सेना ने मंगलवार को पाया कि लद्दाख जानेवाले सात टैंकरों का डीज़ल बेच दिया गया और उसकी जगह पानी भर दिया गया. जम्मू कश्मीर पेट्रोल टैंकर की एसोसिएशन के अनन शर्मा ने बीबीसी को बताया कि सेना के अधिकारियों, टैंकर ड्राइवरों और दलालों की मिलीभगत से यह डीज़ल रास्ते में बेच दिया जाता था. अनन शर्मा का कहना है कि यह घोटाला 1990 में भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों में आई तेज़ी के साथ शुरू हुआ था. उनका कहना है कि सेना को आपूर्ति किया जाने वाला 30 फ़ीसदी से अधिक तेल चोरी चला जाता है. अनन शर्मा का कहना है कि सेना के कुछ अधिकारी टैंकर ड्राइवरों को तेल चोरी करने और उसे बेचने के लिए बाध्य कर देते हैं. यह चोरी गरमी के मौसम में बढ़ जाती है क्योंकि सेना पहाड़ों पर बर्फ जमने से पहले तेल का स्टॉक जमा कर लेती है. सेना की उत्तरी कमान के प्रवक्ता आरके सेन ने इन आरोपों के संबंध में कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालाँकि सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल एनएस बरार ने पत्रकारों को लेह में बताया था कि सेना इस घोटाले की जाँच कर रही है. दूसरी ओर तेल आपूर्ति करने वाली कंपनी इंडियन ऑयल ने भी इस मामले की जाँच शुरू कर दी है. |
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