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झारखंड विवाद सुलझाने का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में असंतुष्ट मंत्रियों से उत्पन्न संकट सुलझा लेने का दावा किया है. मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और असंतुष्ट मंत्रियों की शुक्रवार को बैठक हुई जिसके बाद इसे सुलझा लेने का दावा किया गया. असंतुष्ट मंत्रियों का कहना था कि उनकी माँगे मान ली गईं हैं और मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के साथ सहमति हो गई है. ये मंत्री निर्दलीय विधायक हैं और मुंडा सरकार को समर्थन दे रहे हैं. झारखंड के प्रभारी राजनाथ सिंह ने बीबीसी को बताया कि कुछ गिले-शिकवे थे, उन्हें सुलझा लिया गया है. उनका कहना था कि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने ध्यान से बातें सुनीं और बातचीत कर समाधान निकाल लिया गया. इसके पहले अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ छेड़े अभियान से परेशान भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बेहतर तालमेल के लिए दो समितियाँ गठित करने की माँग स्वीकार कर ली थी. मुंडा सरकार के 12 में से सात मंत्रियों ने नेतृत्व परिवर्तन की माँग कर रहे थे. इनमें से पाँच निर्दलीय हैं जो सरकार को अपना समर्थन दे रहे हैं. निर्दलीयों का समर्थन ग़ौरतलब है कि मुंडा सरकार पाँच निर्दलीय मंत्रियों के समर्थन पर टिकी है. 12 में से सात मंत्रियों के नेतृत्व परिवर्तन की माँग को लेकर राजधानी में आ धमकने से वहाँ की राजनीतिक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. भाजपा की परेशानी यह है कि गठबंधन सरकार के लिए केवल निर्दलीय मंत्री ही कठिनाई उत्पन्न नहीं कर रहे हैं बल्कि पार्टी के अपने मंत्री भी नेतृत्व परिवर्तन की माँग कर रहे हैं. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी अलग मोर्चा खोले हैं. इसके पहले असंतुष्ट मंत्रियों के दबाव के कारण भाजपा ने बेहतर तालमेल कायम करने के लिए दो समन्वय समिति बनाने की घोषणा की थी. भाजपाशासित कई राज्यों में विद्रोह के स्वर उठ रहे हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कई पार्टी विधायक विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर मध्य प्रदेश के बाबूलाल गौर के ख़िलाफ़ भी उमा भारती के समर्थक आवाज़ उठा रहे हैं. |
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