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विद्रोह के स्वर थामने की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में ग़ैरभाजपा मंत्रियों के दबाव के कारण भाजपा ने बेहतर तालमेल कायम करने के लिए दो समन्वय समिति बनाने की घोषणा की है. यह फ़ैसला भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की राज्य इकाई के प्रमुख पदाधिकारियों और झारखंड के प्रभारी राजनाथ सिंह और पार्टी के केंद्रीय संगठन सचिव संजय जोशी के बीच बातचीत के बाद लिया गया. इस बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और राज्य भाजपा के अध्यक्ष यदुनाथ पांडे मौजूद थे. झारखंड भाजपा के प्रभारी राजनाथ सिंह ने बताया कि एक समन्वय समिति में ग़ैरभाजपा के मंत्री शामिल होंगे और दूसरी समिति में एनडीए नेता शामिल होंगे. ग़ौरतलब है कि मंत्रिमंडल में शामिल 12 में से सात मंत्रियों ने मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के इस्तीफ़े की माँग की थी और वे इस माँग को लेकर दिल्ली तक आ गए थे. गंभीर संकट इस समस्या को गंभीर होते देख भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा और पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, झारखंड प्रभारी राजनाथ सिंह और संजय जोशी को बातचीत का रास्ता निकालना पड़ा. राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि झारखंड के कई नेता उनसे मिले थे और उन्होंने समन्वय समिति के बारे में बात की थी. उन्होंने कहा कि विधायकों ने मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को हटाने के बारे में कोई माँग नहीं की. मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी कहा कि उन्हें समन्वय समिति को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. इनमें कितने लोग होंगे और कौन लोग होंगे, यह बातचीत के बाद तय कर लिया जाएगा. ग़ौरतलब है कि भाजपाशासित कई राज्यों में विद्रोह के स्वर उठ रहे हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कई पार्टी विधायक विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर मध्य प्रदेश के बाबूलाल गौर के ख़िलाफ़ भी उमा भारती के समर्थक आवाज़ उठाते रहे हैं. |
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