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झारखंडः करिया मुंडा बने प्रोटेम स्पीकर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में रविवार को सदन के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक करिया मुंडा को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलवाई गई है. अर्जुन मुंडा सरकार ने घोषणा कर रखी है कि वह 14 मार्च को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी. हालांकि राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया है. इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान प्रोटेम स्पीकर यानी कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचु ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. करिया मुंडा को सदन में सरकार के विश्वास मत पर चर्चा करवानी होगी जिसके अंत में मतविभाजन होगा. मुंडा आश्वस्त बीबीसी से हुई बातचीत में नए मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि वे विश्वासमत हासिल करने को लेकर आश्वस्त हैं.
उन्होंने शनिवार को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और पाँच निर्दलीय विधायकों को अपने साथ मंत्री बना दिया था. इन्हीं पाँच विधायकों के दम पर एनडीए सरकार बहुमत साबित करना चाहते हैं. जब उनसे पूछा गया कि इन विधायकों के बारे में कहा जा रहा है कि उन पर दलबदल क़ानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है तो अर्जुन मुंडा ने कहा कि क्या किया जा सकता है यह तो वे बाद में देखेंगे लेकिन इस समय वे निश्चिंत हैं कि उनकी सरकार को बहुमत मिल रहा है. चुनौती लेकिन दूसरी ओर शिबू सोरेन मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री रहे स्टीफ़न मरांडी का कहना है कि एनडीए को समर्थन दे रहे विधायकों में से दो के ख़िलाफ़ दलबदल क़ानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. उनका कहना है कि ये पाँच विधायक दरअसल निर्दलीय नहीं हैं और उनमें से दो अपनी पार्टी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुंडा सरकार जब बहुमत साबित करेगी तो वह पर्याप्त बहुमत नहीं जुटा पाएगी. राजनीतिक उठापटक 27 फ़रवरी को राज्य के चुनाव परिणाम आने के बाद से ही झारखंड में राजनीतिक उठापटक चल रही है और झारखंड के राजनीतिक घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बहस खड़ा कर दिया है.
झारखंड में विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए कम से कम 41 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है. एनडीए ने फ़रवरी में हुए चुनाव में कुल 36 सीटें हासिल की हैं और फिर पाँच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया. लेकिन राज्यपाल ने शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया इसके बाद से विवाद शुरु हुआ. मगर झारखंड में अभी तक जो राजनीतिक दाँव-पेंच नज़र आए हैं उसमें लेकिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले तक विधायकों की जोड़-तोड़, छीना-झपटी का ड्रामा जारी रहेगा. ज़ाहिर है, एक विधायक के भी इधर से उधर होने पर सरकार के भविष्य ख़तरे में पड़ सकता है. |
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