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मंगलवार, 15 मार्च, 2005 को 00:55 GMT तक के समाचार
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अर्जुन मुंडा ने विश्वास मत हासिल किया
अर्जुन मुंडा
झारखंड विधानसभा बहुमत को लेकर विवाद रहा है
झारखंड विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भारी हंगामे के बीच विश्वास मत हासिल कर लिया.

इसके पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के बीच स्पीकर के चयन को लेकर हुए शक्ति परीक्षण में एनडीए के इंदरसिंह नामधारी स्पीकर चुन लिए गए.

नामधारी को ध्वनि मत से स्पीकर चुना गया. इस दौरान यूपीए सदस्यों ने भारी हंगामा किया.

इस दौरान यूपीए के तीन विधायक अनुपस्थित थे. इसमें एनसीपी के विधायक कमलेश सिंह शामिल हैं जो पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं.

इंदरसिंह नामधारी के नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने किया था. हंगामे के दौरान ही उन्हें स्पीकर घोषित कर दिया.

नामधारी ने स्पीकर चुने जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित की और उसके बाद अर्जुन मुंडा को विश्वास मत पेश करने को कहा.

हंगामे के दौरान उन्होंने इसके पक्ष में मतदान करनेवालों से हाथ खड़े करने को कहा.

इसके बाद उन्होंने घोषणा की कि अर्जुन मुंडा को विश्वास मत हासिल हो गया है और उन्हें 40 वोट मिले हैं.

बाद में विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में नामधारी ने कहा कि विपक्ष के 37 वोट थे.

उनका कहना था कि एनसीपी के कमलेश सिंह के अलावा यूजीडीपी की जोबा मांझी और जेएमएम के सुखराम उरांव अनुपस्थित थे.

ये तीनों सदस्य यूपीए के समर्थक माने जाते हैं.

शपथ

अर्जुन मुंडा को शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी और उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया गया था.

मगर मुंडा ने पहले ही विश्वास मत हासिल करने का फ़ैसला किया.

मुख्यमंत्री बनने के बाद बीबीसी से बात करते हुए मुंडा ने कहा,"मैं सदन में बिल्कुल बहुमत साबित कर दूँगा. इसमें कोई भी दो-मत नहीं है. हमारे पास पूर्ण बहुमत है".

एनडीए ने फ़रवरी में हुए चुनाव में कुल 36 सीटें हासिल की और फिर पाँच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया.

लेकिन राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता शिबू सोरेन को यूपीए गठबंधन सरकार बनाने का न्यौता दिया.

मगर बहुमत के लिए विधायक जुटा सकने में नाकाम रहने के बाद सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया जिसके अगले दिन अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाया गया.

उसके बाद मुंडा के साथ उन पाँच निर्दलीय विधायकों ने भी मंत्रिपद की शपथ ली जिनके समर्थन से सरकार बन सकी है.

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