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घरेलू हिंसा पर विधेयक पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में घरेलू झगड़ों में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए लोक सभा ने बुधवार को एक विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया. राज्यसभा से पारित होते ही यह क़ानून बन जाएगा. केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री कांति सिंह ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही है इसलिए इस विधेयक की आवश्यकता महसूस हुई. इस विधेयक की ख़ास बात ये है कि घरेलू हिंसा के दायरे में शारीरिक, मानसिक और यौन प्रताड़ना को तो शामिल किया ही गया है, साथ ही मारपीट की धमकी देने पर भी कार्रवाई हो सकती है. एक महत्वपूर्ण बात इस विधेयक में यह कही गई है कि जो महिलाएँ बिना विवाह के किसी पुरुष के साथ रह रही हों, वो भी घरेलू हिंसा संबंधी विधेयक के दायरे में शामिल हैं. विधेयक में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि पीड़ित महिला हिंसा की शिकार ना हो, इसके लिए ग़ैरसरकारी संस्थाओं की मदद से सुरक्षा अधिकारी के इंतज़ाम करने का भी प्रावधान है. सुरक्षा के इंतज़ाम सरकार का कहना है कि इस क़ानून के लागू होने के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा की रोकथाम में मदद मिलेगी. इस क़ानून के तहत मजिस्ट्रेट पीड़ित महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दे सकता है जिसके तहत उसे प्रताड़ित करने वाला व्यक्ति उस महिला से संपर्क स्थापित नहीं कर सकेगा. मजिस्ट्रेट की ओर से आदेश पारित होने के बाद भी अगर महिला को प्रताड़ित करने वाला व्यक्ति उससे संपर्क करता है या उसे डराता-धमकाता है तो इसे अपराध माना जाएगा और इसके लिए दंड और 20 हज़ार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. मजिस्ट्रेट इस मामले में महिला के दफ़्तर या उसके कामकाज की जगह पर प्रताड़ित करने वाले व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा सकता है. भारत में घरेलू हिंसा की घटनाओं का स्तर कई देशों की तुलना में बहुत अधिक है और लंबे समय से ऐसे क़ानून की माँग महिला संगठनों की ओर से होती रही है. अब इसे राज्यसभा की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा जिसके बाद यह क़ानून का रूप ले लेगा. |
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