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फॉटो सनसनी का दिलचस्प अंत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में 'मुस्लिम चरमपंथियों को ट्रेनिंग' दिए जाने की तस्वीरों की जाँच का अंत बहुत ही दिलचस्प तरीक़े से हुआ है. सेना के एक अधिकारी मेजर अजय अग्रवाल ने कहा है कि यह तस्वीरें उनकी हैं और इन तस्वीरों में कश्मीर में चरमपंथ से मुक़ाबला करने के लिए कुछ नागरिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिन्हें स्पेशल पुलिस ऑफिसर कहा जाता है. मुज़फ़्फ़रनगर के एक फ़ोटो लैब में इन तस्वीरों को साफ़ किए जाने के बाद बड़े पैमाने पर इस मामले की जाँच शुरू हो गई थी क्या चरमपंथियों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक यशपाल सिंह ने कहा है कि मेजर अग्रवाल से बातचीत के बाद लगता है कि वह सही कह रहे हैं, उनसे पूरी बातचीत के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा. मेजर अग्रवाल एक विशेष विमान से मेरठ पहुँच रहे हैं जहाँ वे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात करके तस्वीरों के बारे में पूरी जानकारी देंगे. मेजर अग्रवाल का कहना है कि उनसे कैमरे का रोल घर पर भूल गए थे और उनकी भतीजी ने ग़लती से उसे प्रिंट करने के लिए दे दिया. भारी हंगामा पुलिस उस समय हरकत में आई थी जब कुछ दाढ़ी वाले नौजवानों को आधुनिक हथियारों के साथ इन तस्वीरों में देखा गया. पुलिस को शक हुआ कि यह किसी पहाड़ी इलाक़े में चल रहा चरमपंथी प्रशिक्षण शिविर है. उनका शक और गहरा हो गया जब केंद्रीय गृह मंत्री ने एक दिन पहले संसद में कहा कि कश्मीरी चरमपंथी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने ठिकाने बना रहे हैं. मीडिया में भी ऐसी रिपोर्टें छपती रही हैं कि उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़नगर ज़िले के आसपास के इलाक़ों में चरमपंथियों के ठिकाने हैं. |
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