|
तबादलों पर चुनाव आयोग का निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय चुनाव आयोग ने बिहार प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह चुनाव कार्यों से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला करने से पहले आयोग को सूचित करें. आयोग ने कहा है कि इस निर्देश के तहत ज़िलाधीश, अतिरिक्त ज़िलाधीश और मतदाता सूची बनाने सहित अन्य चुनाव कार्यों से जुड़े अधिकारियों के तबादले आयोग की सहमति के बिना नहीं हो सकेंगे. इसके अतिरिक्त चुनाव आयोग ने सभी ग़ैरज़मानती वारंटों की तामील करने और अवैध हथियारों को ज़ब्त करने की प्रक्रिया को तेज़ करने को कहा है. बिहार विधानसभा भंग होने के बाद वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू है और चुनाव आयोग ने अक्तूबर-नवंबर में चुनाव कराने की घोषणा कर रखी है. चुनाव आयोग के प्रवक्ता के अनुसार आयोग ने बिहार प्रशासन को ये निर्देश एहतियात के तौर भिजवाए हैं. इन निर्देशों का पुलिस अधिकारियों पर कोई असर नहीं होगा जिनके तबादलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वारंट चुनाव आयोग ने इससे पहले 23 जून को भी बिहार प्रशासन को आदेश दिए थे कि वह सभी ग़ैरज़मानती वारंटों के तामील में तेज़ी लाए. इसके अलावा आयोग ने अवैध हथियारों की ज़ब्ती के आदेश भी दिए थे. बिहार सरकार से आयोग ने कहा था कि वह पहली जुलाई 2005 के बाद से हर ज़िले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भेजे. इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रगति से असंतुष्ट आयोग ने इसमें तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं. आयोग ने अपने पहले के आदेश में कहा था कि इस बीच आदतन अपराध करने वालों और असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ भी एहतियाती क़दम उठाने चाहिए. इसके अतिरिक्त आयोग ने बिहार सरकार से कहा था कि वह पुलिस थानों को टेलीफ़ोन, वायरलेस सेट जैसी संचार की सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराए. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||